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गैर-अनुदानित खाद की बिक्री पर रोक, टैगिंग व कालाबाजारी करने वालों पर होगी कार्रवाई

जिला कृषि पदाधिकारी ने उर्वरक कंपनियों के प्रबंधकों को जारी किया निर्देश, नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

कटिहार – जिले में उर्वरकों की बिक्री एवं वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने उर्वरक निर्माता एवं आपूर्तिकर्ता कंपनियों के जिला प्रबंधकों को सख्त निर्देश जारी किया है।

10 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में गैर-अनुदानित उर्वरकों की बिक्री पर प्रतिबंध, अनुदानित खाद के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग रोकने, थोक एवं खुदरा विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश देने और आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने को कहा गया है।जिला कृषि पदाधिकारी ने कृषि निदेशक, बिहार, पटना के 8 अक्टूबर 2026 के पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि अनुदानित यूरिया, डीएपी एवं कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की टैगिंग और बिक्री के संबंध में किसानों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं।

इस तरह की गतिविधियों से किसानों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है और उर्वरक वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता प्रभावित होती है। इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित कंपनियों को निर्देशों का तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।निर्देश के अनुसार, राज्य स्तर पर अनुदानित यूरिया, डीएपी एवं कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की आपूर्ति एवं बिक्री के लिए दी गई अनुमति को छोड़कर उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र फॉर्म ए-2 में अंकित अन्य गैर-अनुदानित उर्वरकों की आपूर्ति एवं बिक्री तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित रहेगी।

सभी कंपनियों को इस आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना होगा।किसी भी परिस्थिति में अनुदानित उर्वरकों के साथ अन्य उर्वरकों की टैगिंग, बंडल बिक्री अथवा किसी अन्य माध्यम से किसानों को अतिरिक्त उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। गैर अनुदानित उर्वरकों एवं टैगिंग उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसानों पर किसी प्रकार की अनावश्यक खरीद का दबाव नहीं पड़े।

जिला कृषि पदाधिकारी ने सभी कंपनियों के जिला प्रबंधकों को अपने-अपने क्षेत्र के थोक एवं खुदरा उर्वरक विक्रेताओं को इन निर्देशों से अवगत कराने और तत्काल अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा है। कंपनियों को उर्वरकों की आपूर्ति, वितरण एवं बिक्री की व्यवस्था प्रचलित नियमों, निर्धारित प्राधिकार पत्र तथा विभागीय निर्देशों के अनुरूप संचालित करनी होगी।निर्देश में कंपनियों के जिला प्रबंधकों को अपने अधीनस्थ अधिकारियों, क्षेत्रीय प्रतिनिधियों, वितरकों एवं संबंधित विक्रेताओं की गतिविधियों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है।

किसी भी स्तर पर नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित कंपनी प्रबंधन एवं जिला प्रबंधक की जवाबदेही तय होगी। कंपनियों को निर्देशों के अनुपालन के बाद की गई कार्रवाई का लिखित प्रतिवेदन जिला कृषि पदाधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराना होगा।पत्र में स्पष्ट किया गया है कि निर्देशों की अवहेलना, टैगिंग, बंडल बिक्री अथवा प्रतिबंधित उर्वरकों की आपूर्ति एवं बिक्री का मामला सामने आने पर संबंधित कंपनी, वितरक या विक्रेता के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिला कृषि पदाधिकारी ने सभी संबंधित कंपनियों को आदेश का तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

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