बिहार :जातिगत समीकरणों ने किया बिहार का बंटाधार , हाशिए पर विकास
राजेश दुबे जाति और संप्रदाय बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे है। 1990 के बाद इसने और जोर पकड़ा जिसके बाद शायद ही कोई राजनैतिक दल इससे अछूता रहा है । जाति और धर्म आधारित चुनावी गठबंधनों का ही नतीजा रहा कि बिहार में विकास कभी मुद्दा नहीं बन पाया । राजनैतिक दल अपनी सुविधा … Read more