मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात से लेकर वैश्विक व्यापार और युद्ध तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा
नई दिल्ली:भारत की मेजबानी में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो चुकी है।दो दिवसीय सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख शामिल होंगे। मालूम हो कि ब्रिक्स बिज़नस फोरम के साथ सम्मेलन की शुरुआत हुई ।
बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, वैश्विक व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें भी प्रस्तावित हैं। इनमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक पर विशेष नजर रहेगी। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के संबंधों में आई तल्खी को कम करने और व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिहाज से यह मुलाकात अहम मानी जा रही है।
पुतिन की मौजूदगी भी अहम
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी सम्मेलन में शामिल होंगे।पुतिन भारत पहुंच चुके है साथ ही अन्य देशों के नेता भी भारत पहुंच रहे है ।
भारत-रूस संबंधों के साथ ऊर्जा, रक्षा और वैश्विक परिस्थितियों पर दोनों देशों के बीच बातचीत होने की संभावना है। पश्चिम एशिया और यूक्रेन संकट के बीच रूस की मौजूदगी सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना रही है।पूरी दुनिया की नजर इस सम्मेलन पर टिकी हुई है।
डिजिटल भुगतान और डॉलर पर चर्चा
ब्रिक्स देशों के बीच कारोबार को आसान बनाने के लिए वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था विकसित करने पर भी मंथन होगा। सदस्य देशों की डिजिटल भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता को कम करना भी माना जा रहा है।
स्टार्टअप से लेकर आपूर्ति श्रृंखला तक मुद्दे
सम्मेलन में स्टार्टअप, एमएसएमई, तकनीक, नवाचार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। भारत ब्रिक्स देशों के बीच कारोबार और निवेश बढ़ाने के साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
पश्चिम एशिया संकट पर बनेगी नजर
ब्रिक्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध को लेकर साझा रुख तैयार करने की होगी। सदस्य देशों के हित अलग-अलग होने के कारण इस मुद्दे पर आम सहमति बनाना आसान नहीं माना जा रहा है। सम्मेलन के अंत में जारी होने वाले संयुक्त घोषणापत्र पर भी दुनिया की नजर रहेगी।
भारत के लिए सम्मेलन अहम
भारत की मेजबानी में हो रहा ब्रिक्स सम्मेलन देश के लिए कूटनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। बदलती वैश्विक शक्ति-समीकरण के बीच भारत आर्थिक सहयोग के साथ वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। सम्मेलन से निकलने वाले फैसले ब्रिक्स के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सम्मेलन को लेकर बढ़ाई गई सुरक्षा
ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है।चप्पे चप्पे पर पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है साथ ही कई रूट को डायवर्ट किया गया है।