आत्मा के सहयोग से 50 प्रगतिशील किसानों ने किया एक दिवसीय परिभ्रमण
जैविक खाद निर्माण और उन्नत कृषि तकनीकों का लिया प्रशिक्षण
कटिहार – कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण आत्मा कटिहार के सहयोग से जिले के किसानों के लिए एक दिवसीय किसान परिभ्रमण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रगतिशील किसान रविशंकर शरण के प्रक्षेत्र पर आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के दो अलग-अलग प्रखंडों के 50 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन आत्मा कटिहार के परियोजना निदेशक राजीव कुमार के मार्गदर्शन में किया गया।
इस दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती, बायोगैस उत्पादन, जैविक खाद निर्माण और उन्नत कृषि तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए आत्मा के उप परियोजना निदेशक शशिकांत झा ने बायोगैस प्लांट के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बायोगैस केवल पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा का स्रोत ही नहीं है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रभावी माध्यम भी है। इसके उपयोग से घरेलू ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ कृषि कार्यों में भी लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने किसानों को रासायनिक खेती का विकल्प अपनाते हुए प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर होने की सलाह दी।रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों से कराया अवगत आत्मा की उप परियोजना निदेशक दीक्षा कुमारी ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे बचने के लिए जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाना जरूरी है।
उन्होंने किसानों को टिकाऊ खेती के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और सुरक्षित कृषि उत्पादन की दिशा में प्रयास करने की सलाह दी।
प्रखंड कृषि पदाधिकारी रश्मि कुमारी ने किसानों को बायोगैस के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बायोगैस को अपनाकर रसोई गैस पर होने वाले मासिक खर्च को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इससे विशेष रूप से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक बचत होगी। बायोगैस संयंत्र से प्राप्त अवशेष का उपयोग जैविक खाद के रूप में भी किया जा सकता है, जिससे कृषि उत्पादन में मदद मिलती है।वर्मी कंपोस्ट और जीवामृत बनाने की बताई। परिभ्रमण कार्यक्रम के दौरान मेजबान एवं प्रगतिशील किसान रविशंकर शरण ने अपने प्रक्षेत्र पर उपस्थित किसानों को वर्मी कंपोस्ट केंचुआ खाद तैयार करने की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक विधि समझाई।
उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जीवामृत, घनजीवामृत और बायोगैस उत्पादन की तकनीकों पर भी विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही किसानों को मत्स्य पालन जैसी सहायक गतिविधियों के माध्यम से कृषि के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसरों से अवगत कराया गया।