नारायण साह /फलका/ कटिहार – प्रखंड क्षेत्र के भंगहा गांव स्थित दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। ग्रामीणों के अनुसार यह मंदिर सौ वर्ष से अधिक पुराना है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां दुर्गा के दरबार में मन्नत मांगने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और दूर-दराज से लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार करीब पांच दशक पहले यहां घास-फूस से बना एक छोटा मंदिर था।
बाद में लगभग 40 वर्ष पूर्व ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के सहयोग से करीब 80 फीट लंबा भव्य मंदिर भवन बनाया गया।श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए मंदिर के ऊपर शिव मंदिर का भी निर्माण कराया गया। मंदिर पूजा समिति के अध्यक्ष उमानाथ पटेल ने बताया कि शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन से ही भंगहा और आसपास के गांवों में भक्तिमय माहौल बन जाता है।
दुर्गा पूजा के दौरान मंदिर परिसर में मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालुओं और मेले में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए पूजा समिति तथा ग्रामीणों की ओर से विशेष व्यवस्था की जाती है। पंडित ने बताया कि भंगहा दुर्गा मंदिर में बलि देने की परंपरा नहीं है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मां दुर्गा को चांदी और सोने के आभूषण अर्पित करते हैं।
इसके अलावा मंदिर परिसर में ध्वजारोहण करने और मिठाई का प्रसाद चढ़ाने की भी परंपरा है। भंगहा दुर्गा मंदिर आज भी आस्था, परंपरा और धार्मिक विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नवरात्र के दौरान यहां जुटने वाले श्रद्धालु मां दुर्गा के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दशार्ते हैं।