कबाड़ से जुगाड़: बेकार वस्तुओं से बच्चों ने बनाई शैक्षणिक सामग्री
बैग लैबशनिवार पर प्राथमिक विद्यालय बिरनाबाड़ी में कौशल विकास की अनूठी पहल, अभिभावकों ने की सराहना
किशनगंज: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप बच्चों में रचनात्मकता, व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्राथमिक विद्यालय बिरनाबाड़ी में बगलेस शनिवार के अवसर पर विशेष गतिविधि का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों को ‘कबाड़ के जुगाड़’ के माध्यम से बेकार पड़ी वस्तुओं से उपयोगी शैक्षणिक सामग्री तैयार करने का हुनर सिखाया गया।

विद्यालय की प्रधान शिक्षिका एवं राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित कुमारी निधि के मार्गदर्शन में आयोजित इस गतिविधि में बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मक प्रतिभा का परिचय देते हुए एक से बढ़कर एक हस्तनिर्मित शैक्षणिक सामग्री तैयार की। बच्चों द्वारा बनाई गई सामग्रियों का प्रदर्शन अभिभावकों के समक्ष किया गया, जिसे देखकर उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की सराहना की और इस पहल के लिए प्रधान शिक्षिका के प्रयासों की जमकर प्रशंसा की।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में किताबी ज्ञान के साथ-साथ अनुभवात्मक शिक्षा, व्यावहारिक कौशल, रचनात्मकता और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने पर विशेष बल दिया गया है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए विद्यालय में बच्चों को गतिविधि-आधारित शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कबाड़ से शैक्षणिक सामग्री बनाने जैसी गतिविधियाँ बच्चों को कम संसाधनों में उपयोगी वस्तुएँ तैयार करने, पर्यावरण के प्रति जागरूक होने और स्वयं करके सीखने का अवसर प्रदान करती हैं।
विद्यालय में संचालित ‘निपुण बालमंच कोना’ भी बच्चों की प्रतिभा को निखारने का एक प्रभावी माध्यम बन रहा है। इसके अंतर्गत बच्चों को पठन-पाठन, लेखन, चित्रकला, कहानी-कथन, गायन, नृत्य, योग और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर दिए जाते हैं। हस्तनिर्मित सामग्रियों का प्रदर्शन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उनकी सृजनात्मक क्षमता को प्रोत्साहित करता है।
प्रधान शिक्षिका कुमारी निधि विद्यालय में नियमित रूप से ऐसी रोचक एवं नवाचारी गतिविधियों का आयोजन करती हैं, जिनसे बच्चों की पढ़ाई आनंदमयी बनती है और अभिभावकों की विद्यालय के प्रति सहभागिता भी बढ़ती है। उनका प्रयास है कि विद्यालय केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, व्यावहारिक दक्षता और जीवनोपयोगी कौशल का केंद्र बने।
बगलेस शनिवार के दिन इस पहल ने एक बार फिर साबित किया कि सीमित संसाधनों में भी नवाचार और रचनात्मक सोच के माध्यम से बच्चों को सीखने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।