संवाददाता:अब्दुल जब्बार
सीमांचल क्षेत्र में केला, अनानास और चाय की खेती के लिए पहचान रखने वाले ठाकुरगंज प्रखंड में अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ सब्जी की खेती में भी नए प्रयोग कर रहे हैं। छैतल पंचायत के किसान अब्दुल राजीक ने मेहनत और बेहतर प्रबंधन के दम पर चार बीघा जमीन में खीरे की खेती कर मिसाल पेश की है।
महज एक माह से कुछ अधिक समय में तैयार हुई फसल से उन्हें लगातार उपज मिल रही है और खेत से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में खीरा बाजार तक पहुंचाया जा रहा है।अब्दुल राजीक बताते हैं कि उन्होंने पहले धान, मक्का, अनानास, चायपत्ती और केला जैसी फसलों की खेती की है। इस बार उन्होंने रबी मौसम में खीरे की खेती करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में पहले दिन करीब 20 किलो खीरा खेत से निकला।
अगले दिन उपज बढ़कर एक क्विंटल तक पहुंच गई। इसके बाद उत्पादन लगातार बढ़ता गया और अब प्रतिदिन करीब 10 क्विंटल खीरा खेत से निकालकर बाजार में भेजा जा रहा है। अब्दुल राजीक का कहना है कि खेती से होने वाली आमदनी से परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्च पूरे होते हैं।अब्दुल राजीक कहते हैं कि यदि किसान आधुनिक तरीके से मेहनत और लगन के साथ खेती करें तो उन्हें रोजगार के लिए दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर पलायन करने की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है।
उनका कहना है कि खेत को सही तरीके से तैयार कर कम अवधि वाली फसलों का उत्पादन किसानों के लिए आय का एक जरिया बन सकता है।वहीं किसान मुमताज आलम, नईमुद्दीन आदि ने बताया कि रिश्तेदार के सुझाव पर उन्होंने खीरे की खेती शुरू की थी।
पहले नुकसान को लेकर चिंतित थे लेकिन खीरे की खेती ने उनकी किस्मत को बदल दिया है और करीब 27 दिनों में फसल तैयार होकर बाजार तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि इस खेती से उन्हें लाभ मिला है और अब आगे खीरे की खेती का क्षेत्र बढ़ाने की तैयारी है।