दिघलबैंक/मुरलीधर झा
भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में ग्रामीणों के बीच जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से बुधवार को सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 12वीं वाहिनी के ‘डी’ समवाय अंतर्गत बाह्य सीमा चौकी पिलटोला के कार्यक्षेत्र में आने वाले बनारसी टोला गांव में ग्राम समन्वय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता उप निरीक्षक मोहन सिंह ने की।
बुधवार को आयोजित इस बैठक में एसएसबी की ओर से पांच जवानों एवं गांव के 10 ग्रामीणों ने भाग लिया। इस दौरान ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई तथा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
बैठक में श्री अन्न के महत्व और उसके स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही ग्रामीणों को श्री अन्न की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि कृषि के क्षेत्र में नए अवसरों को बढ़ावा मिल सके।
नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता पर जोर
एसएसबी अधिकारियों ने ग्रामीणों को स्वयं तथा अपने बच्चों को नशे से दूर रखने की अपील की। नशे के सेवन से होने वाली विभिन्न बीमारियों और इसके सामाजिक एवं पारिवारिक दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देते हुए नशामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करने का आह्वान किया गया।
इसके अलावा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, मानव तस्करी पर रोक, सीमा पार अवैध गतिविधियों की रोकथाम तथा घुसपैठ पर अंकुश लगाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के बीच आपसी सहयोग बेहद जरूरी है।
संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील
बैठक के दौरान ग्रामीणों से अपील की गई कि सीमावर्ती क्षेत्र में किसी भी प्रकार की संदिग्ध या अवैध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल एसएसबी को सूचित करें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। मानव तस्करी तथा समाज और देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने में ग्रामीणों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।
इसके साथ ही जल परियोजनाओं, स्वच्छता तथा बरसात के मौसम में संभावित बाढ़ से सतर्क रहने और बचाव के उपायों के संबंध में भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया।
बैठक के अंत में उप निरीक्षक मोहन सिंह ने ग्रामीणों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और आपसी तालमेल, सामाजिक सौहार्द एवं शांति बनाए रखने की अपील की। इस प्रकार की ग्राम समन्वय बैठकें सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा, जागरूकता और ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।