हस्तरेखा एवं ग्रहविज्ञान कार्यशाला
कटिहार – शहर के बिनोदपुर जैन अतिथि सभागार में मुनिश्री प्रशांत कुमार एवं मुनिश्री कुमुद कुमार के सान्निध्य में तेरापंथ सभा कटिहार की ओर से हस्तरेखा एवं ग्रहविज्ञान कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमार जी ने कहा- जैन धर्म वैज्ञानिक धर्म है। वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित है। जैन धर्म में ज्योतिष का महत्व है क्योंकि यह एक बड़ा विज्ञान है। भूगोल के बारे में भी बहुत कुछ लिखा गया है।

ज्योतिष शास्त्र पर अनेक आचार्यों ने बड़े बड़े ग्रंथ लिखे हैं। अष्टांग निमित्त पर आचार्य भद्रबाहु स्वामी ने सविस्तार लिखा है। ज्योतिष शास्त्र ज्ञान का विषय है। अपने कर्म आचरण अच्छा है तो कोई भी ग्रह आपका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। अपने कर्म एवं आचरण को अच्छा बनाए।कर्म उदय में आने के लिए कोई निमित्त बनता है। कर्म अच्छे है तो सब अच्छा ही अच्छा होगा।
अपने पिता के साथ नम्रता का व्यवहार करें। जिससे जीवन तेजस्वी बनता है। उगते हुए सूर्य को देखकर “सिद्धा” का जप करें तो बाधाएं दूर होती है। कार्य में सफलता मिलती है। अगर मन पवित्र है तो चंद्र ग्रह अपने आप अनुकूल बनता है। नवकार मंत्र, तीर्थंकर का जप करने से ग्रह सारे अनुकूल हो जाते है। सभी ग्रहों का अपना अपना प्रभाव हो सकता है। लेकिन हम उन्हें अपने अनुकूल बना सकते है। प्रवीणा बंसल अनेक विषयों के ज्ञाता हैं।
धर्म के संस्कार है। मंगलकामना करता हूं कि ये विकास करें और सबके विकास में सहायक बने। रतनलाल जी भंसाली सेवाभावी धर्मनिष्ठ श्रावक है। एस्ट्रो प्रवीणा बंसल ने कहा कि ग्रह नक्षत्र को मजबूत करके अपनी समस्या को कमजोर कर सकते है। मंत्र जप से प्रत्येक ग्रह का उपाय कर सकते है। भक्तामर स्तोत्र,लोगस्स पाठ, नवकार महामंत्र से काफी दोष खत्म हो जाते है।
अपनी हथेली को प्रतिदिन सुबह देखें। अपने कर्म को प्रधान रखकर ही कार्य करना है। समस्या के कारण को खोजकर कार्य करें। हनुमान नाहटा ने बताया कि एस्ट्रो प्रवीणा बंसल ने प्रोजेक्टर के माध्यम से हस्तरेखा एवं ग्रहविज्ञान के बारे में सविस्तार बताया।सभा मंत्री राजकुमार पुगलिया, रतनलाल भंसाली ने विचार व्यक्त किए। सभा द्वारा साहित्य से सम्मानित किया गया।