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वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत दिघलबैंक के 12 सीमावर्ती गांवों में शुरू हुआ जागरूकता अभियान

मुरलीधर झा /दिघलबैंक।

अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों में स्थानीय समुदाय के साथ विश्वास एवं सहयोग की भावना मजबूत करने, सीमा सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सीमा प्रबंधन में ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार से वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-द्वितीय चरण के तहत प्रखंड के 12 सीमावर्ती गांवों में जागरूकता एवं जनसंपर्क गतिविधियों की शुरुआत की गई। चयनित गांवों में प्रशासन की ओर से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।


वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत दिघलबैंक प्रखंड के टप्पू, बैजनाथ पलसा, मालटोली, लोहागाड़ा, पांचगाछी, डोरिया, सिघीमारी, तुलसिया, धनतोला, हाड़ीभिट्टा, सिघीमारी मिलिक और पलसा गांवों का चयन किया गया है।
इन गांवों में स्थानीय ग्रामीणों के साथ नियमित बैठक एवं संवाद स्थापित कर सीमा क्षेत्र से संबंधित समस्याओं, आवश्यकताओं और सुझावों की जानकारी ली जा रही है। प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों एवं जमीनी परिस्थितियों को समझते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।

सामुदायिक स्थानों पर हुए जागरूकता कार्यक्रम

चयनित गांवों के विद्यालयों, सामुदायिक केंद्रों एवं अन्य उपयुक्त स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों एवं बच्चों को सीमा सुरक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं की जानकारी दी गई।
स्थानीय समुदाय की भागीदारी से सांस्कृतिक कार्यक्रम, राष्ट्रीय एकीकरण से जुड़े कार्यक्रम एवं अन्य सामुदायिक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।


सीमावर्ती क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए आपदा एवं आपातकालीन स्थिति में तैयारी तथा बचाव व्यवस्था को लेकर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को आपदा की स्थिति में आवश्यक सावधानियों और सुरक्षित प्रतिक्रिया की जानकारी देना है।

तैयार किया जा रहा गांवों का विस्तृत प्रोफाइल

वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत चयनित गांवों का ग्राम प्रोफाइल भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रारूप में गांव की आबादी, परिवारों की संख्या, अनुसूचित जाति एवं जनजाति की स्थिति, सड़क एवं परिवहन, बिजली, पेयजल, शौचालय, विद्यालय, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार, भूमि एवं आवास सहित विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की जाएगी।
इसके अलावा गांव के धार्मिक स्थल, बाजार, इंटरनेट एवं मोबाइल नेटवर्क की स्थिति, स्थानीय समस्याएं, उपलब्ध संसाधन, एसएसबी की गतिविधियां तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को भी ग्राम प्रोफाइल में शामिल किया जाएगा। इससे प्रत्येक सीमावर्ती गांव की वास्तविक स्थिति एवं जरूरतों का विस्तृत दस्तावेज तैयार करने में मदद मिलेगी।

डोरिया गांव पहुंचे डीपीआरओ, ग्रामीणों से किया सीधा संवाद

इसी अभियान के तहत जिला जनसंपर्क पदाधिकारी गुप्तेश्वर कुमार ने शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वाइब्रेंट विलेज डोरिया का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर गांव की विभिन्न समस्याओं, आवश्यकताओं एवं उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली।
ग्रामीणों से सीधे संवाद के माध्यम से अधिकारियों ने जमीनी स्तर की स्थिति का फीडबैक प्राप्त किया। दौरे के दौरान गांव में विकास, मूलभूत सुविधाओं तथा सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़ी आवश्यकताओं को समझने पर विशेष जोर दिया गया।
डीपीआरओ गुप्तेश्वर कुमार ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में विकास गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय एवं विश्वास स्थापित करना है। ग्रामीणों की भागीदारी से सीमा सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा गांवों की स्थानीय जरूरतों को प्रशासन तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। किशनगंज जैसे अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े जिले में इस पहल के तहत विकास, जनभागीदारी, जागरूकता और सीमा सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को एक साथ मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस अवसर पर एलएस जुली कुमारी, धनतोला पंचायत के मुखिया लखीराम हांसदा, उप मुखिया गौतम कुमार गणेश, ग्राम कचहरी सचिव सोमनाथ सिंह सही स्थानीय क्षेत्र के लोग उपस्थित रहे।

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