न्यायालय के आदेश पर प्रशासन की कार्रवाई
प्रभावित दुकानदारों ने रोजगार और दुकान के लिए उचित जगह उपलब्ध कराने की लगाई गुहार
मनिहारी /कटिहार – न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मनिहारी बस स्टेशन के समीप एनएचएआई की भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई दुकानों को प्रशासन ने हटा दिया। कार्रवाई के बाद वर्षों से दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जहां सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की दिशा में प्रशासनिक पहल है, वहीं इससे प्रभावित दुकानदारों के सामने आजीविका का विकल्प तलाशने की चुनौती भी उत्पन्न हो गई है।
जानकारी के अनुसार बबलू, मुन्ना ठाकुर, राजेश चौरसिया और उत्तम मंडल सहित कई दुकानदार वर्षों से सड़क किनारे सरकारी भूमि पर झोपड़ी बनाकर दुकान चलाते थे। इसी से होने वाली आमदनी उनके परिवारों के भरण-पोषण का मुख्य सहारा थी। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व इन दुकानदारों ने सामूहिक रूप से व्यवस्थित तरीके से दुकानें बनाई थीं।
हालांकि लोकभूमि पर बिना अनुमति निर्मित दुकानों को न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रशासन ने हटवा दिया।
कार्रवाई के बाद प्रभावित दुकानदारों के समक्ष परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने और भविष्य में आजीविका चलाने की चिंता गहरा गई है। दुकानें हटने से उनकी आय का प्रमुख साधन समाप्त हो गया है। ऐसे में परिवार के भरण-पोषण के साथ बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करना भी उनके लिए चुनौती बन सकता है।
दुकानदारों ने प्रशासन से लगाई गुहार
बेरोजगार हुए दुकानदारों ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उनके जीवन -यापन के लिए रोजगार की व्यवस्था कराने तथा दुकान खोलने के लिए कोई उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि वे वर्षों से दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे थे। अब दुकानें हट जाने के बाद उनके सामने आजीविका का गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।
न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराना प्रशासनिक दायित्व है। वहीं प्रभावित परिवारों की आजीविका के सवाल पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में दुकानदारों को नियमानुसार वैकल्पिक स्थान या रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की पहल उनके लिए राहत का माध्यम बन सकती है।