राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जारी किया पत्र, महोत्सव के आयोजन के लिए राशि आवंटन की दिशा में मांगा गया विस्तृत प्रतिवेदन
संवाददाता /किशनगंज
शहर के ऐतिहासिक लाइन बूढ़ी कालीबाड़ी मंदिर में आयोजित होने वाले 125वें काली महोत्सव को बिहार सरकार की सूची में शामिल किए जाने से श्रद्धालुओं में खुशी है। मां काली के प्रति अटूट आस्था और 1902 से चली आ रही पूजा की परंपरा को अब सरकारी स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। महोत्सव के आयोजन के लिए राशि आवंटन की दिशा में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने पत्र जारी कर संबंधित अधिकारियों से विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा है। बिहार सरकार के भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की पहल और सहयोग को इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।विभागीय पत्र के अनुसार, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सर्वेक्षण कार्यालय, पटना की ओर से किशनगंज जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है। पत्रांक 09/मेला आवंटन-III-57/ 2026-2887(9)/रा० के तहत जारी इस पत्र में किशनगंज शहर स्थित ऐतिहासिक लाइन बूढ़ी कालीबाड़ी मंदिर में 125वीं काली पूजा के आयोजन का उल्लेख किया गया है। पत्र में कहा गया है कि विभागीय परिपत्र संख्या 2894(9) के तहत राज्य के महत्वपूर्ण मेलों के आयोजन के लिए विभागीय स्तर से राशि आवंटित करने के संबंध में मानक निर्धारित किए गए हैं। इसी के आलोक में किशनगंज के डीएम से विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है ताकि राशि आवंटित किए जाने के बिंदु पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
मंत्री की पहल से धार्मिक धरोहर को मिली नई पहचान
ऐतिहासिक मंदिर के 125वें काली महोत्सव को सरकारी सूची में शामिल कराने की पहल में बिहार सरकार के भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के सहयोग को मंदिर कमेटी और श्रद्धालुओं ने महत्वपूर्ण बताया है। इस उपलब्धि पर मंदिर कमेटी की ओर से मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इससे किशनगंज की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर को व्यापक पहचान मिलेगी तथा महोत्सव के आयोजन को बेहतर बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
1902 से चली आ रही मां काली की पूजा की परंपरा
लाइनपाड़ा स्थित बूढ़ी कालीबाड़ी मंदिर किशनगंज के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां वर्ष 1902 से मां काली की पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। समय के साथ स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर का स्वरूप विकसित हुआ। काली पूजा के अवसर पर यहां विशेष अनुष्ठान होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर से शहर के लोगों की गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है।125वें काली महोत्सव के आयोजन को सरकारी स्तर पर पहचान मिलने से मंदिर कमेटी और श्रद्धालुओं में उत्साह है। अब विभागीय मानकों के अनुरूप विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराए जाने के बाद राशि आवंटन को लेकर आगे की कार्रवाई होगी। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सरकारी सहयोग से इस वर्ष का महोत्सव और व्यवस्थित तरीके से आयोजित होगा तथा किशनगंज की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष भजन पाल व सचिव विक्की दास, कोषाध्यक्ष देवराज दास,मनोज मजुमदार,साधन दास , अमित कुमार दास, अजिताभ राही,कुशल दास, अनिर्बान दास,दीपक कुमार, राजा दत्ता, कल्याण बोस,जित सरकार, गोपाल कर्मकार, सुब्रत ज्वारदार और अन्य सभी सदस्यों ने ऐतिहासिक लाइन बूढ़ी काली मंदिर को बिहार सरकार की सूची में शामिल कराने के लिए माननीय भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल जी के प्रति हृदय से धन्यवाद एवं आभार प्रकट करते हुए कहा कि आपके सहयोग से किशनगंज की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर को एक नई पहचान मिली है। माँ काली की कृपा आप पर सदैव बनी रहे। वहीं ऐतिहासिक लाइन बूढ़ी काली मंदिर, किशनगंज के 125वें वर्ष की पूर्णता के अवसर पर 8 नवंबर को मां काली की विशेष पूजा अर्चना और 9 नवंबर को मंदिर परिसर में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर बंग्ला भाषा की सुप्रसिद्ध बाउल कलाकार द्वारा बाउल संगीत, श्यामा संगीत एवं भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी।इस दौरान मां काली की भक्ति और बंगाल की समृद्ध लोकसंगीत परंपरा से सजी यह संध्या श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी।
1902 से हो रही मां काली की पूजा, श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक है मंदिर; देश के कई प्रमुख नेता भी कर चुके हैं दर्शन। बूढ़ी काली मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां मां काली के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए सालों भर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। खासकर काली पूजा के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर का इतिहास 1902 से जुड़ा है। समय के साथ यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ शहर की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
मंदिर में मां काली की पूजा की शुरुआत छोटे से मंदिर में प्रतिमा स्थापित कर की गई थी। शुरुआती दौर में पूजा सीमित स्तर पर होती थी, लेकिन धीरे-धीरे स्थानीय लोगों की सहभागिता बढ़ती गई। श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर का विस्तार हुआ और आज यह भव्य स्वरूप में स्थापित है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा और पूजा व्यवस्था को लेकर भी समय-समय पर आवश्यक कार्य किए जाते रहे हैं।
मन्नत पूरी होने पर प्रतिमा अर्पित करते हैं श्रद्धालु
मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि मां काली के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु प्रतिमा अर्पित करते हैं। इसी आस्था के कारण मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। पूजा समिति की ओर से धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। काली पूजा के दौरान मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।
देश के प्रमुख नेताओं की भी रही है आस्था
ऐतिहासिक बूढ़ी काली मंदिर की प्रसिद्धि किशनगंज के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी है। मंदिर में देश के कई प्रमुख राजनीतिक एवं सामाजिक व्यक्तित्व दर्शन कर चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी यहां मां काली के दर्शन कर चुके हैं। इससे मंदिर की पहचान और व्यापक हुई है।