अररिया में प्रेसवार्ता कर पार्टी ने उठाया बिहार के हितों का मुद्दा, कहा- किसानों, पेयजल और उद्योगों पर पड़ रहा असर
अररिया/बिपुल विश्वास
फरक्का (गंगा) जल संधि को लेकर जदयू ने बिहार के हितों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया है। शुक्रवार को जिला जदयू की ओर से संचिता पैलेस में प्रेसवार्ता आयोजित कर ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ अभियान की जानकारी दी गई। पार्टी ने स्पष्ट कहा कि वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं है और इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए।
जदयू जिलाध्यक्ष पवन मिश्रा ने कहा कि पार्टी का स्पष्ट मत है कि फरक्का जल संधि से बिहार को नुकसान हो रहा है। हाल में संसद के मानसून सत्र के दौरान जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने राज्यसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने कहा था कि संधि का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और यदि कोई नई व्यवस्था बनती है तो उसमें वर्ष 2050 तक बिहार की जल जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार का जल प्रबंधन प्रभावित हुआ है और राज्य गंभीर जल संकट की स्थिति का सामना कर रहा है। जदयू का दावा है कि शुष्क मौसम में बिहार के हिस्से के पानी पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे किसानों की सिंचाई, पेयजल, उद्योगों की जरूरत और लोगों की आजीविका प्रभावित होती है।
बाढ़ और सूखे का भी जताया खतरा
जदयू नेताओं ने कहा कि फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद जमा होने और नदी तल ऊंचा होने से उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या बढ़ती है। वहीं, शुष्क मौसम में पानी की उपलब्धता कम होने से बिहार के कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति पैदा होती है। पार्टी ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय जल समझौते का बड़ा भार बिहार को उठाना पड़ रहा है।
जिलाध्यक्ष पवन मिश्रा ने कहा कि बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए फरक्का जल संधि की समीक्षा जरूरी है। जदयू का यह अभियान किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि बिहार के अधिकार और जनता के हित से जुड़ा विषय है।
12 जिलों में चल रहा ‘नीतीश संवाद’
पार्टी की ओर से बताया गया कि ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ अभियान के तहत जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में संवाद कर रहे हैं। इनमें बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं।
अभियान की शुरुआत पांच सितंबर को बक्सर से हुई है और इसका समापन कटिहार में होगा। जदयू नेताओं के अनुसार, अभियान के माध्यम से फरक्का जल संधि के प्रभावों को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है और बिहार की आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रेसवार्ता में रानीगंज के पूर्व विधायक व प्रदेश महासचिव अचमित ऋषिदेव ने कहा कि फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के हक से जुड़े इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाना और संधि पर पुनर्विचार के लिए केंद्र तक बिहार की आवाज पहुंचाना जरूरी है।
इस दौरान प्रदेश सचिव संचिता मंडल, रमेश सिंह, राजू मंडल, ललन मंडल, शिवपूजन पोद्दार सहित जदयू के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।