संयमित, मधुर और हितकारी वाणी से जीवन में आती है शांति
किशनगंज:पर्युषण महापर्व के चौथे दिन तेरापंथ समाज की ओर से वाणी संयम दिवस श्रद्धा एवं आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। आचार्य महाश्रमण की अनुकम्पा से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के मंगलमय उच्चारण से हुआ। इसके बाद महिला मंडल की सदस्यों ने वाणी संयम दिवस पर आधारित गीतिका प्रस्तुत की।

उपासक महावीर दुगड़ एवं झब्बर दुगड़ के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में वाणी के महत्व पर प्रकाश डाला गया। झब्बर दुगड़ ने कहा कि वाणी मनुष्य के व्यक्तित्व का दर्पण है। मधुर और संयमित वाणी रिश्तों में प्रेम तथा जीवन में शांति का संचार करती है, जबकि असंयमित वाणी अनेक समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए बोलने से पहले विचार करना आवश्यक है कि हमारे शब्द किसी के मन को ठेस तो नहीं पहुंचा रहे।
महावीर दुगड़ ने कहा कि वाणी पर संयम रखना आत्म-संयम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कम बोलना, मधुर बोलना, सत्य बोलना और हितकारी बोलना ही वाणी की सार्थकता है। पर्युषण के इन पावन दिनों में वाणी को संयमित करते हुए आत्मशुद्धि और निर्जरा की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम के माध्यम से समाज के लोगों को अपनी वाणी में संयम, मधुरता और विवेक अपनाने का संदेश दिया गया।