राज कुमार /पोठिया/किशनगंज
डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, अर्राबाड़ी, पोठिया किशनगंज में उर्वरक विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय आवासीय प्रमाणपत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम का अठारहवाँ एवं उन्नीसवाँ बैच शुक्रवार से शुरू हुआ। प्रशिक्षण 11 से 25 सितंबर तक चलेगा। इसमें बिहार के विभिन्न जिलों से कुल 60 उर्वरक विक्रेता भाग ले रहे हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ नोडल अधिकारी एवं पाठ्यक्रम समन्वयक-सह-प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. श्वेता कुमारी ने मुख्य अतिथि डॉ. के. सत्यनारायण, सह-अधिष्ठाता-सह-प्राचार्य, डीकेएसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।
डॉ. श्वेता कुमारी ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उर्वरक विक्रेता किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए उन्हें मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्वों की आवश्यकता और संतुलित उर्वरक उपयोग की वैज्ञानिक जानकारी होना जरूरी है। प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागी किसानों को बेहतर एवं वैज्ञानिक कृषि सलाह देने में अधिक सक्षम होंगे।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने अपना परिचय देते हुए अपनी शैक्षणिक एवं व्यावसायिक पृष्ठभूमि, अनुभव और प्रशिक्षण से जुड़ी अपेक्षाएं साझा कीं। इससे प्रतिभागियों के बीच संवाद और आपसी परिचय का माहौल बना।
मुख्य अतिथि डॉ. के. सत्यनारायण ने कहा कि उर्वरक कृषि उत्पादन का महत्वपूर्ण घटक है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ उसका सही और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उर्वरक विक्रेताओं की भूमिका इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विक्रेताओं की तकनीकी दक्षता बढ़ाने और किसानों तक वैज्ञानिक कृषि जानकारी पहुंचाने में मददगार साबित होंगे।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मृदा स्वास्थ्य, मृदा परीक्षण, विभिन्न पोषक तत्वों की आवश्यकता, संतुलित एवं समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग तथा किसानों को उचित कृषि सलाह देने से जुड़े विषयों की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में सैद्धांतिक कक्षाओं के साथ व्यावहारिक जानकारी भी दी जाएगी।
कार्यक्रम में डॉ. सत्यप्रकाश, डॉ. सुनील, एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, डॉ. एस.सी. पॉल, विभागाध्यक्ष, मृदा विज्ञान, डॉ. भोलानाथ साहा, डॉ. हिना परवीन, डॉ. केविन क्रिस्टोफर, श्री मनीष, डॉ. विनोद, डॉ. नागार्जुन एवं डॉ. घनश्याम ठाकुर सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
15 दिवसीय यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उर्वरक विक्रेताओं की तकनीकी क्षमता बढ़ाने के साथ किसानों तक मृदा स्वास्थ्य और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।