उपहार नहीं, संस्कार चाहिए; फूल नहीं, भविष्य संवारने का संकल्प चाहिए :मिश्रा
दिघलबैंक/प्रतिनिधि
शिक्षक दिवस के अवसर पर प्राथमिक विद्यालय उत्तर कुढ़ेली में शनिवार को एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। जहां आमतौर पर शिक्षक दिवस पर बच्चे अपने शिक्षकों को फूल, मिठाई और उपहार भेंट करते हैं, वहीं विद्यालय के प्रधान शिक्षक विक्रम मिश्रा ने बच्चों से किसी भी प्रकार का उपहार नहीं लेने का संदेश देते हुए उन्हें समाज और राष्ट्र के बेहतर भविष्य के लिए संकल्प दिलाया ।

प्रधान शिक्षक विक्रम मिश्रा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “उपहार नहीं, संस्कार चाहिए; फूल नहीं, भविष्य संवारने का संकल्प चाहिए।” उन्होंने कहा कि किसी शिक्षक के लिए सबसे बड़ा उपहार महंगी वस्तुएं, फूल या मिठाई नहीं, बल्कि उसके विद्यार्थियों का अच्छा चरित्र, श्रेष्ठ संस्कार और उज्ज्वल भविष्य होता है।

उन्होंने बच्चों से नशे से दूर रहने और अपने परिवार एवं समाज को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का संकल्प दिलाया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी नियमित देखभाल करने की अपील की। बच्चों ने माता-पिता का सम्मान करने, बड़ों का आदर करने, जरूरतमंदों की सहायता करने तथा जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने का भी प्रण लिया।
प्रधान शिक्षक ने कहा कि यदि बच्चे नशे से दूर रहकर, पर्यावरण की रक्षा करते हुए और अच्छे संस्कारों के साथ जीवन में आगे बढ़ते हैं तो यही किसी शिक्षक के लिए शिक्षक दिवस की सबसे सुंदर गुरु-दक्षिणा होगी।
इस अवसर पर शिक्षक नरेश कुमार सिंह, सुनिल कुमार सिंह एवं मारिया निजामी ने भी बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों एवं शिक्षकों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे नशे से दूर रहेंगे, पर्यावरण की रक्षा करेंगे, पौधारोपण कर उनकी देखभाल करेंगे तथा एक स्वस्थ, स्वच्छ और संस्कारित समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
विद्यालय परिवार की इस पहल ने शिक्षक दिवस को केवल उपहारों और औपचारिकताओं का पर्व नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर चरित्र निर्माण और समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश देने वाले अवसर के रूप में यादगार बना दिया।