न्यूज लेमनचूस

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पिंजरे में मुनिया

अकबर इलाहाबादी मुंशी कि क्लर्क या ज़मींदारलाज़िम है कलेक्टरी का दीदार हंगामा ये वोट का फ़क़त हैमतलूब हरेक से दस्तख़त है हर सिम्त मची हुई है हलचलहर दर पे शोर है कि चल-चल टमटम हों कि गाड़ियां कि मोटरजिस पर देको, लदे हैं वोटर शाही वो है या पयंबरी हैआखिर क्या शै ये मेंबरी है … Read more

यह क्या हो रहा है

अकबर इलाहाबादी कोई हँस रहा है कोई रो रहा हैकोई पा रहा है कोई खो रहा है कोई ताक में है किसी को है गफ़लतकोई जागता है कोई सो रहा है कहीँ नाउम्मीदी ने बिजली गिराईकोई बीज उम्मीद के बो रहा है इसी सोच में मैं तो रहता हूँ ‘अकबर’यह क्या हो रहा है यह … Read more

तुम इतना खुश कैसे रह लेते हो ?

तलाश जिंदगी की थी,दूर तक निकल पड़े,जिंदगी मिली नहीं,तज़ुर्बे बहुत मिले,किसी ने मुझसे कहा कि,तुम इतना ख़ुश कैसे रह लेते हो? तो मैंने कहा कि,मैंने जिंदगी की गाड़ी से,वो साइड ग्लास ही हटा दिये,जिसमेँ पीछे छूटते रास्ते और,बुराई करते लोग नजर आते थे! छोडो़ ना यार, क्या रखा है सुनने और सुनाने को,हम मस्ती में … Read more

जीवन क्या है -श्री आर सी प्रसाद सिंह

श्री आर सी प्रसाद सिंह की कविता । यह जीवन क्या है? निर्झर है, मस्ती ही इसका पानी है।सुख-दुख के दोनों तीरों से चल रहा राह मनमानी है। कब फूटा गिरि के अंतर से? किस अंचल से उतरा नीचे?किस घाटी से बह कर आया समतल में अपने को खींचे? निर्झर में गति है, जीवन है, … Read more

शिक्षक दिवस विशेष ! गुरु – शिष्य परंपरा ??

मधुबाला मौर्या प्रभु पद पंकज नावहिं सीसाभक्त भयो न कोई हनुमंत वीराचीर के सीना प्रतिबिम्ब दर्शायेऐसी श्रद्धा भाव और भक्ति प्रभु पद पंकज नावहिं सीसापार्थ भयो न कोई अर्जुन जैसाविश्व रूप दर्शा गयेगीता का उपदेश बतला गये प्रभु पद पंकज नावहिं सीसाशिष्य भयो न कोई एकलव्य के जैसाद्रोणाचार्य पद पंकज नावहिं सीसाअंगूर देहि गुरुदक्षिणा परंपरा … Read more

पक्ष और विपक्ष

मधुबाला मौर्या कुछ पक्ष में बोलेंगेकुछ विपक्ष में बोलेंगेकुछ की सहमति होगीकुछ की असहमति होंगीकुछ देख के बोलेंगे कुछ गढ़ के बोलेंगे कुछ तो कड़वा बोलेंगे कुछ मीठा बोलेंगेकुछ एक सुर में बोलेंगे कुछ अलग से बोलेंगेकुछ सबको बोलेंगे कुछ तुमको बोलेंगेकुछ तो बोल चुके कुछ बाकि है कुछ तो हर बात पे बोलेंगे या … Read more

गर सीखना हो तो !

मधुबाला मौर्या ज़िन्दगी में एकता में बल सियारों से सीखियेज़िन्दगी में एक साथ चलना चींटियों से सीखिए ध्यान लगाना दाना चुगने वाले कबूतरों से सीखियेऔर स्वामी भक्ति कुकुर से सीखिए प्रेम करना पपीहा से सीखियेछल करना लोमड़ी से सीखिये मुर्ख बनना कौवों से सीखियेरंग बदलना छिपकली से सीखिये छीन लेना कपियो से सीखियेतूफान आने पर … Read more

कविता :समझ जाती हैं हम लड़कियां

निधि चौधरी समझ जाती हैं हम लड़कियां“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””समझ जाती हैं हम लड़कियां,हर व्यवहार तुम्हारे।मन मे पलने वाले,विचार तुम्हारे। समझ जाती हैं हम लड़कियां,यूँ भीड़ में जानबूझ कर,तुम्हारा हमसे से टकरा जाना। समझ जाती है हम लड़कियांकुछ ढूंढती हुई,उन गन्दी नज़रों को…..जिन्हें देख सम्हालने लगते है हम,अपनी चुनरी अपने दुपट्टे को।और फिर रास्ता बदल कर चल देतें … Read more

अंत ही आरंभ है …

मधुबाला मौर्या अंत और आरम्भएक ही डोर के दो छोर चलते है साथ-साथरहते है एकसाथ आरम्भ सीखता जाता हैअंत सिखला जाता है क्षण भर में, जीव का अंतया निर्जीव -जीव हो जाता आरम्भ है तभी तो अंत हैगर अंत नहीं तो आरम्भ कहाँ? आरम्भ में, मैं – मैं ही हूंअंत में, मैं – तुम हूं … Read more

मेरी सिमरन मेरी बेटी !

मधुबाला मौर्या तेरे बचपन की खिलखिलाती हँसीं देखती हूंनिःशब्द उसमें विचरण करती हूं,तेरी बचकानी हरकतों मेंअपना बचपन देखती हूं । तेरी जिद्द, अहंकार देखती हूं न भुल पाने वाला व्यक्तित्व देखती हूं,हर दूसरे को डांटने का खोजना बहानाखाना छोड़ के रूठ जाना कुण्डी लगा के हर बात मनवा लेना,तेरे बचकानी हरकतों में अपना बचपन देखती … Read more