तलाश जिंदगी की थी,
दूर तक निकल पड़े,
जिंदगी मिली नहीं,
तज़ुर्बे बहुत मिले,
किसी ने मुझसे कहा कि,
तुम इतना ख़ुश कैसे रह लेते हो?
तो मैंने कहा कि,
मैंने जिंदगी की गाड़ी से,
वो साइड ग्लास ही हटा दिये,
जिसमेँ पीछे छूटते रास्ते और,
बुराई करते लोग नजर आते थे!
छोडो़ ना यार, क्या रखा है सुनने और सुनाने को,
हम मस्ती में जीते हैं जलने दो जमाने को!
(साभार: सोशल मीडिया)
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