रबी फसलों की बुआई से पहले बीजोपचार अपनाने की किसानों से अपील
जैव उत्पादों के संतुलित उपयोग पर जोर
कटिहार – रबी फसलों में बेहतर अंकुरण, स्वस्थ पौधों के विकास और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए किसानों को वैज्ञानिक तरीके से बीजोपचार अपनाना चाहिए। इसके लिए जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने किसानों से गेहूं, मक्का, चना, मसूर, सरसों सहित अन्य रबी फसलों की बुआई से पहले उचित बीजोपचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ फसल की नींव खेत में बीज डालने से पहले ही रखी जाती है।
गुणवत्तायुक्त बीज, उपयुक्त बीजोपचार और लाभकारी सूक्ष्मजीवों का सही उपयोग फसल की शुरुआती अवस्था को मजबूत बनाता है। उन्होंने किसानों को बीजोपचार को महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि फसल सुरक्षा, पोषण प्रबंधन और टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कदम के रूप में अपनाने की सलाह दी। इसके तहत एफआईआर तकनीक के माध्यम से जरूरत के अनुसार बीजोपचार करने पर जोर दिया गया है।
इसमें एफ यानी फफूंदनाशी से बीज एवं मृदाजनित रोगों से बचाव, आई यानी कीटनाशी से शुरुआती अवस्था में लगने वाले कीटों का नियंत्रण तथा आर यानी राइजोबियम एवं अन्य लाभकारी जैव उत्पादों के उपयोग से पौधों के पोषण और वृद्धि में सहायता शामिल है।कृषि पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक फसल में तीनों प्रकार के उपचार अनिवार्य रूप से करना जरूरी नहीं है।
फसल की प्रकृति, रोग एवं कीट की आशंका और संबंधित उत्पाद की अनुशंसा के अनुसार ही उपचार का चयन करना चाहिए। ट्राइकोडर्मा बीज एवं मृदाजनित रोगों के जैविक प्रबंधन में सहायक है। दलहनी फसलों में राइजोबियम कल्चर जड़ों में गांठों के निर्माण और वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में मदद करता है। वहीं, एजोटोबैक्टर और एजोस्पिरिलम जैसे जैव उत्पाद पौधों के पोषण एवं वृद्धि में योगदान देते हैं।
बीवेरिया बेसियाना का उपयोग कुछ लक्षित कीटों के जैविक नियंत्रण के लिए किया जाता है। गेहूं, मक्का, चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों में बीजोपचार का चयन फसल एवं रोग की स्थिति के अनुरूप करने की सलाह दी गई है। रासायनिक फफूंदनाशी का इस्तेमाल भी संबंधित फसल और रोग के लिए स्वीकृत अनुशंसा के अनुसार ही करना चाहिए।
किसानों को सलाह दी गई है कि फफूंदनाशी, कीटनाशी और जीवित जैव कल्चर को बिना तकनीकी पुष्टि के एक साथ न मिलाएं। विभिन्न उत्पादों के बीच आवश्यक अंतराल और उपचार का क्रम उत्पाद-विशिष्ट निर्देशों के अनुसार रखें। इससे बीजों का बेहतर अंकुरण, स्वस्थ पौध स्थापना, शुरुआती रोग एवं कीट से होने वाले नुकसान में कमी और टिकाऊ उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि बीजोपचार के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें तथा अनुशंसित मात्रा और विधि का पालन करें। वैज्ञानिक तरीके से बीजोपचार अपनाकर किसान फसल की गुणवत्ता सुधारने के साथ उत्पादन लागत कम करने और बेहतर उपज प्राप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।