व्यंग्य :माननीय का…हरण !
डॉ. सजल प्रसाद
माननीय का…हरण !व्यंग्य / डॉ. सजल प्रसाद••••••••••••••••••••••••••••••••• सभी हैरत में थे कि ये क्या हो गया ! … सारा प्लान फेल हो गया था … ! बाजी पलट गई थी … सट्टा बाजार की हवा निकल गई थी … जैसे, हवा से भरे उड़ते गुब्बारे में कौवे ने चोंच मार दी हो … सिक्कों के … Read more