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कर्तव्य के लिए प्रेरित करता है विकास महोत्सव- मुनि प्रशांत

33 वां विकास महोत्सव का भव्य आयोजन

कटिहार – मुनि श्री प्रशांत कुमार, मुनि श्री कुमुद कुमार के सान्निध्य में 33 वां विकास महोत्सव का आयोजन हुआ। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमार ने कहा – विकास महोत्सव आचार्य श्री तुलसी के कर्तृत्व के साथ जुड़ा हुआ है। उन्होंने अपने शासनकाल में नये नये आयाम खोले, कार्य किए उसी के आधार पर यह विकास महोत्सव मनाया जा रहा है। इसका नामकरण आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के दूरदर्शी चिंतन का परिणाम है। इसके माध्यम से संघ में नया विकास होता रहें।

विकास का अर्थ है आगे बढ़ना प्रगति करना। विवेक पूर्ण कार्य करें। कार्यशीलता निरन्तर बनी रहें। प्रत्येक परिस्थिति में समता बनाए रखना। गुरुदेव श्री तुलसी का जीवन निरन्तर प्रगतिशील रहा। जीवन के अंत तक कार्य में लगे रहें। स्वागत सम्मान बहुत मिला तो विरोध भी बहुत हुआ।कार्यकर्ता को कार्य करने की प्रेरणा के साथ नया चिंतन का बोध देते। अलग -अलग माध्यमों से साधु साध्वी के जीवन का विकास किया।संघ का विकास किया।

आचार्य श्री तुलसी ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण मानवता के कल्याण में व्यतीत किया। आचार्य श्री तुलसी का जीवन विकास का जीवन था। उन्होंने जागते हुए सपने देखें और उन्हें पूरा किया।समग्र जैन धर्म और मानवता के विकास के लिए कार्य करते थे।आचार्य तुलसी क्रांतिकारी विचारकथे। उनके चिंतन में विकास ही परिलक्षित होता था। विरोधों की परवाह न करते हुए अपनी शक्ति को सकारात्मक कार्यों में लगाए रखा।उनका कहना था कि व्यक्ति चाहे जिस धर्म को माने परन्तु सबसे पहले नैतिक मूल्यों को जीवन में अवश्य अपनाएं।

मुनि श्री कुमुद कुमार ने कहा कि आचार्य श्री तुलसी की प्रज्ञा, समयज्ञता,दूरदर्शीता ने संघ में अनेकों नए आयाम स्थापित किए। उन्होंने मानव जाति के उत्थान के लिए लगभग एक लाख किलोमीटर की पदयात्रा कर दुनिया को शांति का संदेश दिया।विकास एवं विरोध दोनों ही आचार्य श्री तुलसी के साथ जुड़े रहे सम्मान एवं अलंकरण से प्रसन्नता नहीं तो विरोध से घबराए नहीं। संयम ग्रहण से लेकर जीवन के अंतिम पल तक कार्य करते रहे एवं जीवंत प्रेरणा संघ को देते रहे। अनुशास्ता न केवल दायित्व से थे अपितु स्वयं जीवन व्यवहार से बने रहे।शुभ भविष्य का चिंतन दिया संघ का,मानव जाति का। नारी जाति के उत्थान के लिए सतत जागरुकता से प्रयास किया जिसका परिणाम आज देख रहे हैं कि धर्मसंघ का महिला समाज देश के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाकर अनेक मुकाम हासिल किए हैं। सभा मंत्री राजकुमार पुगलिया ने बताया कि नेपाल बिहार सभा के आयोजन एवं कटिहार सभा के आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल के मंगलाचरण से हुआ।

तत्पश्चात् श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन तनसुख बैद ने किया।नेपाल बिहार सभा अध्यक्ष विरेंद्र संचेती, कटिहार सभा अध्यक्ष विमल बैंगाणी, बिहार झारखंड प्रभारी राजेश पटावरी, तेरापंथ युवक परिषद् अध्यक्ष मनीष नाहटा,तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्ष संगीता पटावरी, भिक्षु सेवा ट्रस्ट अध्यक्ष राजकरण दफ्तरी, नेपाल बिहार सभा मंत्री नवरत्न बैंगाणी, चैनरुप दुगड़, फारबिसगंज से महेंद्र बैद, दलखोला से सुजानमल सेठिया,खुशकीबाग से राजेन्द्र कोठारी, अररिया कोर्ट से अमित नाहटा, अररिया आरएस से राजकुमार बांठिया, माथाभांगा से श्रीमती मीनू धाडेवा,नीमली से गौतम नाहर, पटना से मनोज बैंगाणी, टाटानगर से अशोक बोथरा, फारबिसगंज से नीलम बोथरा ने गीत एवं व्यक्तव्य द्वारा गुरुदेव तुलसी के प्रति भावना, क्षमायाचना एवं तप अनुमोदना व्यक्त की। आभार ज्ञापन सभा मंत्री राजकुमार पुगलिया ने किया। तपोभिनंदन के कार्यक्रम का कुशल संचालन अमित नाहटा ने किया।कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि श्री कुमुद कुमार जी ने किया।संघगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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