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सरकारी जमीन के विवाद में फिर गरमा उठा सिंघिमारी रसियाडांगी, तीर-धनुष और भाला लेकर अंचल कार्यालय पहुंचे सैकड़ों आदिवासी

दोनों पक्षों के पांच-पांच प्रतिनिधियों के साथ प्रशासन ने की बैठक, फिलहाल शांत हुआ मामला, बेघर और भूमिहीन परिवारों की जांच के बाद होगी नियमानुसार कार्रवाई

पोठिया/किशनगंज/राज कुमार 

  परलाबाड़ी पंचायत अंतर्गत सिंघिमारी रसियाडांगी में सरकारी जमीन को लेकर चल रहा विवाद मंगलवार को एक बार फिर गरमा गया। अपनी मांगों को लेकर करीब तीन सौ की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग तीर-धनुष, भाला, ढोल-नगाड़े लेकर प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर पोठिया पहुंच गए। बड़ी संख्या में लोगों के अचानक पहुंचने से परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी और तनाव की स्थिति बनी रही।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वरीय अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद विभिन्न थानों से पुलिस पदाधिकारी और पर्याप्त पुलिस बल के साथ दंगा नियंत्रण वाहन भी अंचल परिसर पहुंचा। पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया। प्रशासन ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों को बुलाकर बातचीत शुरू की ।

आदिवासी समुदाय का दावा है कि रसियाडांगी मौजा में करीब 202 एकड़ बिहार सरकार की जमीन है। इसमें लगभग 85 एकड़ भूमि पर वे लंबे समय से पुश्तैनी दखलकार के रूप में खेती और जोत आबाद करते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि पिछले कुछ समय से कुछ लोग उक्त जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। आदिवासी समुदाय ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर विवाद का समाधान कराने की मांग की।

प्रशासन ने दोनों पक्षों के पांच-पांच प्रतिनिधियों के साथ सभागार में बैठक की। बैठक में सीओ मोहित राज, आरओ मनोज चौधरी, ठाकुरगंज थानाध्यक्ष अंजय अमन, ठाकुरगंज इंस्पेक्टर पंकज कुमार पंथ, पहाड़कट्टा थानाध्यक्ष फुलेन्द्र कुमार, अर्राबाड़ी थानाध्यक्ष कनक लता सहित पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। काफी देर तक चली बातचीत के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनाई गई और फिलहाल विवाद को शांत कराया गया।

क्या है पूरा जमीन विवाद

विवाद परलाबाड़ी पंचायत के मौजा रसियाडांगी, थाना संख्या 168, खाता संख्या 132 तथा खेसरा संख्या 195, 196, 197, 224 और 225 की गैर-मजरुआ बिहार सरकार की भूमि को लेकर है। उक्त भूमि का कुल रकबा करीब 202 एकड़ 93 डिसमिल बताया गया है। लंबे समय से इस जमीन पर खेती किए जाने की बात सामने आती रही है। वर्तमान विवाद मुख्य रूप से करीब 20 एकड़ भूमि के हिस्से को लेकर बताया जा रहा है।

विवादित जमीन डोक नदी के मुहाने के समीप स्थित है। स्थानीय स्तर पर बताया गया कि पिछले कुछ समय में नदी की धार दूसरी ओर खिसक रही है। इससे जमीन के भौगोलिक स्वरूप में भी बदलाव आया है। जमीन की स्थिति में बदलाव और अलग-अलग पक्षों के दावे ने विवाद को और पेचीदा बना दिया है।

विगत शुक्रवार को भी आमने-सामने आए थे दोनों पक्ष

इसी जमीन को लेकर बीते शुक्रवार को ग्रामीण आमने-सामने आ गए थे। सूचना मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंचा और समझा-बुझाकर स्थिति को तत्काल नियंत्रित किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा था। मंगलवार को इसी प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग अपनी मांग लेकर अंचल कार्यालय पहुंचे।

सीओ बोले, कानून व्यवस्था से समझौता नहीं

सीओ मोहित राज ने कहा कि सिंघिमारी रसियाडांगी मामले में दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत की गई। आदिवासी समुदाय की ओर से कुछ मांगें रखी गई हैं। यदि कोई परिवार वास्तव में बेघर या भूमिहीन है और उसके पास रहने के लिए जमीन नहीं है, तो सरकार के प्रावधानों के तहत नियमानुसार बंदोबस्ती की कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लोगों को सरकार के संबंधित प्रावधानों और अभियान बसेरा जैसी योजनाओं के तहत प्राथमिकता देने का प्रावधान है। ऐसे परिवारों की राजस्व कर्मचारी से जांच कराई जाएगी। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जमीन पर दखल के सवाल पर सीओ ने कहा कि वर्तमान में प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाए रखना है। किसी भी पक्ष को ऐसी कोई गतिविधि नहीं करनी है, जिससे तनाव या विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो। किस व्यक्ति का कितनी जमीन पर दखल है, यह जांच का विषय है। 

सीओ ने बताया कि पूरे मामले से जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया जाएगा। वरीय अधिकारियों से जो भी निर्देश प्राप्त होगा, उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद ग्रामीण शांतिपूर्वक वापस लौट गए। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है। प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह के तनाव से बचने की अपील की है।

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