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गैस हादसे ने बुझाए दो घरों के चिराग: दिल्ली में जीजा-साले की मौत, अलीनगर में पसरा मातम

रिपोर्ट:मनोज कुमार

बीते दिनों दिल्ली में हुए गैस हादसे का असर जिले के इमामगंज के अलीनगर गांव नमस्ते तक पसर गया। अलीनगर गांव में मातम पसार है। गैस हादसे में इमामगंज के जीजा-साले की मौत हो गई। दोनों दिल्ली में रहकर स्लीपर का काम करते थे। हादसे के बाद दोनों को गंभीर हालत में एम्स में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 6 सितंबर को दोनों ने दम तोड़ दिया। दोनों की मौत से दोनों के घरों में कोहराम मचा है। दोनों की डेड बॉडी इमामगंज पहुंचते ही पूरा इलाका गमजदा है।

दोनों के शव सोमवार को एंबुलेंस से गांव लाए गए। शव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। गांव के लोग भी गम के साये में डूब गए। घर के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई। हर किसी की आंखें नम है।

खाना खाकर सोए थे, कुछ देर बाद कमरे में मच गई चीख-पुकार

परिजनों के अनुसार, घटना 3 सितंबर की है। पंकज कुमार और उनके जीजा राजेंद्र राम दिल्ली में ड्यूटी से लौटे थे। दोनों कमरे पर पहुंचे। खाना बनाया। खाना खाने के बाद दोनों सो गए।


बताया गया कि इसी दौरान कमरे में गैस का रिसाव हुआ। इसके बाद आग लग गई। देखते ही देखते गैस सिलेंडर में विस्फोट हो गया। कमरे में सो रहे दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। किसी तरह दोनों को बाहर निकाला गया। इसके बाद इलाज के लिए दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया। दोनों की हालत गंभीर बनी हुई थी। डॉक्टरों ने दोनों को बचाने का भरपूर प्रयास किया। लेकिन 6 सितंबर को दोनों की मौत हो गई।

बेटे की मौत पर पिता बोले- गांव में ही रोजगार मिलता तो बाहर नहीं जाता

पंकज कुमार की मौत से उनके पिता परमेश्वर दास पूरी तरह टूट चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को गांव और आसपास रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। स्थानीय स्तर पर काम मिलेगा तो गरीब परिवारों के युवाओं को रोजगार के लिए दिल्ली और दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। उनकी बात में बेटे को खोने का दर्द साफ झलक रहा था। रोजगार की तलाश में घर से निकला बेटा अब कभी वापस नहीं आएगा।

मां को लकवा, जवान बेटे की मौत ने बढ़ाया दर्द


पंकज कुमार की मां पहले से ही गंभीर परेशानी से जूझ रही हैं। उन्हें लकवा मार चुका है। वह बोल भी नहीं पाती हैं। ऐसे में जवान बेटे की मौत ने परिवार का दर्द और बढ़ा दिया है। जिस घर में बेटे के लौटने का इंतजार रहता था, वहां अब उसकी अर्थी पहुंची है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

राजेंद्र तीन भाइयों में थे दूसरे नंबर पर


राजेंद्र राम, पिता जगलाल दास, पलामू जिले के रहने वाले थे। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। दिल्ली में रहकर काम करते थे। हादसे में उनकी मौत की खबर मिलते ही पलामू स्थित उनके घर में भी मातम छा गया।
जीजा-साले की एक साथ मौत ने दोनों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव के लोगों का कहना है कि दोनों रोजी-रोटी के लिए घर से दूर दिल्ली गए थे। किसी ने नहीं सोचा था कि वहां से दोनों के शव वापस आएंगे। यह हादसा सिर्फ दो परिवारों का दुख नहीं है। यह उन हजारों परिवारों
की मजबूरी भी दिखाता है, जिनके युवा रोजगार के लिए बिहार से बाहर जाने को मजबूर हैं। इमामगंज में हर वर्ष दूसरे प्रदेश में काम करने वालों की डेड बॉडी पहुंचती है। जिनकी संख्या हर वर्ष दर्जन सेअधिक हो जाती है।

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