समस्याओं से मुँह फेर लेना राजनीति में हो सकता है पत्रकारिता में नहीं।।
सुशील आम जनता को किसी मुद्दे पर जागरूक करना हो, या फिर सत्ता में प्राण प्रतिष्ठित मठाधीश को उनके ही क्षेत्रीय समस्याओं से अवगत कराना हो… या फिर अफसरशाही की भेंट चढ़े लोक लुभावन योजनाओं की बात हो.. ऐसे में याद आते हैं निडर और बेबाक पत्रकार। जो समस्या को “मैनेज” करने के बजाय उन्हें … Read more