स्कॉटिश में पटाखों की जगह रंगों ने की बात
बच्चों की रंगोली बोली – बदलाव हमसे
कटिहार- दीपावली आमतौर पर पटाखों, शोर और धुएं से पहचानी जाती है। लेकिन बरमसिया स्थित स्कॉटिश पब्लिक स्कूल में इस बार दीपावली कुछ अलग ही अंदाज में मनी। यहाँ न धुआं था, न शोर। था तो सिर्फ दीयों की लौ, रंगों की खुशबू और बच्चों के दिलों से निकले सामाजिक संदेश।विद्यालय प्रांगण में आयोजित ‘दीपोत्सव – कुछ अलग, कुछ सार्थक’ ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।इस दीपोत्सव की सबसे बड़ी खासियत थी छात्र-छात्राओं द्वारा बनाई गई लगभग 100 रंगोलियाँ।
लेकिन ये सिर्फ रंगोली नहीं थीं, ये समाज का आईना थीं। कहीं विकसित भारत का सपना रंगों में उकेरा गया था, तो कहीं नशा मुक्ति का संकल्प। कहीं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की पुकार थी, तो कहीं बाल विवाह, लिंग भेद और भ्रूण हत्या के खिलाफ गुस्सा। स्वच्छता और शिक्षा के मौलिक अधिकार पर बनी रंगोलियों ने लोगों को रुककर सोचने पर मजबूर कर दिया।
इस बार विद्यालय को महंगी सजावट से नहीं, बल्कि वेस्टेज सामानों और पर्यावरण अनुकूल, प्रदूषण मुक्त सामग्रियों से सजाया गया था। पुरानी बोतलें, कागज, कपड़े और बेकार समझी जाने वाली चीजें बच्चों के हाथों में आकर खूबसूरत सजावट बन गईं। बच्चों ने साबित कर दिया कि उत्सव मनाने के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुँचाना जरूरी नहीं है।स्कॉटिश दीपोत्सव में चित्रकला प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें लगभग 200 आकर्षक पेंटिंग प्रदर्शित की गईं।
सामाजिक जागरूकता और प्रेरणा पर आधारित इन पेंटिंग्स को देखने के लिए अभिभावकों और आगंतुकों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर पेंटिंग में एक कहानी थी, एक संदेश था।कार्यक्रम का शुभारंभ चेयरमैन डॉ. अविनाश कुमार, निर्देशक गीत अविनाश, प्राचार्य श्रीनिवास, उप प्राचार्य जयदीप चट्टोपाध्याय, सीबीएसई इंचार्ज शैलेंद्र कुमार वर्मा, विद्यालय समन्वयक पवन कुमार, परीक्षा नियंत्रक सुप्रीत सुर, मिफ्ता उल हक, मृणाल चक्रवर्ती, कल्याण चक्रबर्ती, श्रीमती लकी आदि शिक्षकों ने मिलकर दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
चेयरमैन डॉ. अविनाश कुमार ने कहा कि आज मुझे लगा कि दीपावली का असली पटाखा तो बच्चों की सोच में फूटा है। जब बच्चा रंगोली में ‘नशा मुक्त भारत’ लिखता है, तो वह सिर्फ रंगोली नहीं बनाता, वह अपना भविष्य लिखता है।निर्देशक गीत अविनाश ने कहा, “हमने बच्चों को नहीं सिखाया कि क्या बनाना है, उन्होंने हमें सिखाया कि क्या सोचना है। बेटी को बचाना, शिक्षा को अधिकार समझना – यही तो सच्चा दीपोत्सव है।
प्राचार्य श्रीनिवास ने कहा, “यह दीपोत्सव किताबों से बाहर की पाठशाला था। बच्चों ने सिखाया कि कचरा भी कला बन सकता है, अगर सोच साफ हो।”उप प्राचार्य जयदीप चट्टोपाध्याय ने कहा, “आज स्कूल का प्रांगण नहीं, बच्चों के विचार चमक रहे थे। यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
मीडिया प्रभारी सह कला विभागाध्यक्ष कौशिक कर ने कहा, “हमने इस बार पटाखे नहीं फोड़े, हमने सोच जलाई। एक दीया घर जलाता है, एक विचार समाज जलाता है। यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम बच्चों को केवल अच्छे अंक लाने वाला विद्यार्थी नहीं, बल्कि अच्छा नागरिक बनाएं। इस दीपोत्सव ने बता दिया कि बदलाव की शुरुआत कहीं और नहीं, इन्हीं नन्हे हाथों से होगी।”उन्होंने बच्चों के नाम संदेश में कहा कि इस दीपावली हम पटाखा नहीं, प्रकाश फैलाएंगे। नशे को ना कहेंगे, बेटियों का सम्मान करेंगे, स्वच्छता अपनाएंगे और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।