प्राथमिक विद्यालय उत्तर कुढ़ेली की अनूठी पहल बनी आकर्षण का केंद्र
दहेज प्रथा, बाल विवाह, नशाखोरी और अशिक्षा के खिलाफ बच्चों ने जगाई जागरूकता की अलख
मुरलीधर झा/दिघलबैंक (किशनगंज)
नवरात्र के पावन अवसर पर प्राथमिक विद्यालय उत्तर कुढ़ेली में बच्चों ने मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को धारण कर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता की अनूठी अलख जगाई। मां दुर्गा के विभिन्न रूपों में सजे नन्हे-मुन्ने बच्चों की आकर्षक प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
बच्चों ने शिक्षा रूपी अस्त्र के माध्यम से दहेज प्रथा, बाल विवाह, अशिक्षा, नशाखोरी, भ्रूण हत्या, हिंसा, प्रदूषण और सामाजिक असमानता जैसी बुराइयों पर प्रतीकात्मक प्रहार करते हुए समाज को सकारात्मक बदलाव का संदेश दिया।
कार्यक्रम में बच्चों ने विभिन्न सामाजिक कुरीतियों को प्रतीकात्मक पात्रों के रूप में प्रस्तुत कर उनके अंत का दृश्य दिखाया। इस अनूठी पहल के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि जिस प्रकार मां दुर्गा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक हैं, उसी प्रकार शिक्षा, जागरूकता और सकारात्मक सोच के बल पर समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है।

नौ स्वरूप, नौ संदेश: बच्चों ने समझाए जीवन के आदर्श
बच्चों ने मां शैलपुत्री के स्वरूप से शक्ति और दृढ़ता, मां ब्रह्मचारिणी से तपस्या और संयम तथा मां चंद्रघंटा से साहस और वीरता का संदेश दिया। मां कूष्मांडा के स्वरूप से सृजन एवं सकारात्मक ऊर्जा, मां स्कंदमाता से प्रेम, करुणा और वात्सल्य तथा मां कात्यायनी के स्वरूप से अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा दी गई।
वहीं, मां कालरात्रि के स्वरूप से निर्भयता और बुराइयों पर विजय, मां महागौरी से पवित्रता एवं शांति तथा मां सिद्धिदात्री के स्वरूप से ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश दिया गया। बच्चों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि इन आदर्शों को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में भी अपनाना चाहिए।
शिक्षा और संस्कार से बनेगा बेहतर समाज : विक्रम मिश्रा
विद्यालय के प्रधान शिक्षक विक्रम मिश्रा ने बच्चों एवं अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि मां दुर्गा के नौ स्वरूप जीवन के विभिन्न आदर्शों और सकारात्मक गुणों की प्रेरणा देते हैं। शक्ति, दृढ़ता, अनुशासन, साहस, प्रेम, करुणा, निर्भयता और ज्ञान जैसे गुणों को अपनाकर ही बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों में अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित करना भी है। शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर कर सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
विद्यालय की इस पहल ने यह संदेश दिया कि बच्चों को प्रारंभ से ही शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों और नैतिक मूल्यों से जोड़ना जरूरी है। इस तरह की गतिविधियां बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस अवसर पर शिक्षक नरेश कुमार सिंह, सुनील कुमार गणेश, जुली कुमारी और एस. राही सहित विद्यालय के बच्चे तथा पोषक क्षेत्र के कई अभिभावक उपस्थित रहे।