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ट्रेन हादसे में कैसे होगा रेस्क्यू? रेलवे और एनडीआरएफ ने परखी अपनी तैयारी

ट्रेन में लगी आग लगने का मॉक ड्रिल

दो बोगियों में आग और दो दर्जन से अधिक यात्रियों के फंसने का बनाया गया परिदृश्य, रेलवे-दमकल व एनडीआरएफ की टीम ने किया संयुक्त अभ्यास

अररिया/अरुण कुमार

ट्रेन में अचानक आग लगने और बोगियों में यात्रियों के फंसने की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य किस तरह किया जाएगा, इसे लेकर गुरुवार को रहमतपुर रेलवे स्टेशन पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। रेलवे, एनडीआरएफ और दमकल विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से आपात स्थिति से निपटने का अभ्यास किया। इस दौरान यात्रियों को सुरक्षित निकालने, घायलों को प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का पूर्वाभ्यास किया गया।

मॉक ड्रिल के तहत अररिया कोर्ट जंक्शन से रहमतपुर स्टेशन की ओर आ रही एक पैसेंजर ट्रेन में शॉर्ट सर्किट के कारण दो बोगियों में आग लगने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। दोनों बोगियों में दो दर्जन से अधिक यात्रियों के फंसे होने का दृश्य तैयार किया गया। घटना की सूचना मिलते ही स्टेशन मास्टर ने कंट्रोल रूम के साथ आरपीएफ, जीआरपी, दमकल विभाग और एनडीआरएफ को सूचित किया। इसके बाद विभिन्न एजेंसियों के मौके पर पहुंचने और बचाव अभियान शुरू करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।

स्ट्रेचर, रस्सी और कटर से यात्रियों को निकाला

अभ्यास के दौरान दमकल कर्मियों ने पानी की मदद से आग बुझाने की कार्रवाई की। वहीं, एनडीआरएफ के जवानों ने बोगियों में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए स्ट्रेचर, रस्सी और कटर का इस्तेमाल किया। बचाव दल ने एक-एक कर यात्रियों को बाहर निकालने और घायलों को प्राथमिक उपचार देने का अभ्यास किया। इसके बाद घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से सदर अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया भी दोहराई गई।

एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन के कमांडेंट एचपीएस कंडारी ने बताया कि मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ के करीब 40 जवान शामिल हुए। टीम ने बोगियों में फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया का अभ्यास किया, ताकि वास्तविक हादसे के दौरान त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

आपसी समन्वय और त्वरित कार्रवाई पर जोर

एडीआरएम मनोज सिंह ने बताया कि रेलवे और एनडीआरएफ की ओर से हर साल विभिन्न जिलों में संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य दुर्घटना के समय अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और राहत-बचाव कार्य में लगने वाले समय को कम करना है।

अभ्यास के दौरान बचाव अभियान में लगे समय, संसाधनों के इस्तेमाल और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का आकलन भी किया गया। मौके पर रेलवे के अधिकारी, आरपीएफ इंस्पेक्टर, स्टेशन प्रबंधक, अररिया जिला प्रशासन के प्रतिनिधि और आरएस थाना की पुलिस मौजूद रही।

अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के नियमित अभ्यास से आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव दल की तत्परता बढ़ती है और वास्तविक दुर्घटना के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिलती है।

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