किशनगंज:पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के सप्तम दिवस सोमवार, 14 सितंबर को ध्यान दिवस के रूप में मनाया गया। आचार्य महाश्रमण की अनुकंपा तथा उपासक महावीर दुगड़ एवं झब्बर दुगड़ के सानिध्य में कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के मंगल उच्चारण से हुआ। इसके बाद महिला मंडल ने सुमधुर गीतिका प्रस्तुत की, जिससे वातावरण आध्यात्मिक भावों से सराबोर हो गया।

उपासक महावीर दुगड़ ने ध्यान की महत्ता और उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ध्यान मन की चंचलता को शांत कर आत्मा के निकट ले जाने का सशक्त माध्यम है। नियमित ध्यान से मन में शांति, एकाग्रता और समता का विकास होता है। उन्होंने कहा कि ध्यान केवल कुछ समय की क्रिया नहीं, बल्कि जीवन को साधने की प्रक्रिया है। जीवन में त्याग और संयम को स्थान देने के साथ ध्यान को दैनिक साधना का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हुए राग-द्वेष से मुक्त होकर सम्यक्त्व की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने एकाग्रचित्त होकर सामूहिक ध्यान साधना की और आत्मनिरीक्षण किया। सामूहिक ध्यान से कार्यक्रम स्थल पर शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।
प्रवचन के बाद पर्युषण महापर्व के दौरान तपस्या कर रहे तपस्वियों के तप की भावपूर्ण अनुमोदना की गई। महिला मंडल ने अनुमोदनार्थ मंगलाचरण प्रस्तुत किया। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद, अणुव्रत समिति और तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के पदाधिकारियों ने तपस्वियों के त्याग, तप और संयम की अनुमोदना करते हुए उनका अभिनंदन किया।
दफ्तरी परिवार और पींचा परिवार ने गीतिका प्रस्तुत कर तपस्वियों के प्रति श्रद्धा एवं अनुमोदना व्यक्त की। इसके बाद महिला मंडल की ओर से लगातार 9 उपवास की तपस्या कर रहे तेरापंथी सभा अध्यक्ष विजयकरण दफ्तरी, वर्षा दफ्तरी और सीमा पींचा को साहित्य भेंट कर उनकी तपस्या की अनुमोदना की गई।
सावन मास में मौलिक श्यामसुखा ने आठाई तपस्या के साथ तपस्या की शुरुआत की थी। कम उम्र में उनके आत्मबल और तप के प्रति भी सभा की ओर से भावपूर्ण अनुमोदना व्यक्त की गई।
सावन-भादों मास में तपस्या करने वाले अन्य तपस्वियों की भी साहित्य भेंट कर अनुमोदना की गई। इनमें चंदा देवी श्यामसुखा की सावन-भादों एकांतर तप, सुमन सुराना की सावन एकांतर तप, हर्षा बैद की सावन एकांतर तप, हेमा दुगड़ का एकासन का मासखमण, खुशबू दुगड़ का वयासन का मासखमण, कमला देवी बोकड़िया की मौन की अठाई, निशा लुणिया की मौन की अठाई तथा प्रियंका सेठिया की एकासन की अठाई शामिल है।