पोठिया प्रखंड के पहले काव्य-संग्रह को साहित्यिक जगत ने बताया महत्वपूर्ण उपलब्धि
पोठिया/किशनगंज/राज कुमार
मजलिस-ए-शेर-ओ-अदब, किशनगंज के तत्वावधान में कोलथा पंचायत भवन, पोठिया में मासिक काव्य एवं साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर युवा कवि आफ़ताब अज़हर सिद्दीकी के प्रथम काव्य-संग्रह ‘अश्क-ए-वफ़ा’ का गरिमापूर्ण विमोचन किया गया। बिहार सरकार के उर्दू निदेशालय के वित्तीय सहयोग से प्रकाशित इस काव्य-संग्रह को पोठिया प्रखंड का पहला काव्य-संग्रह बताया गया।
समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार एवं कवि जनाब एहसानुल इस्लाम एहसान क़ासमी (पूर्णिया) ने की, जबकि मंच संचालन डॉ. तैयब फ़ुरक़ानी ने किया। मुख्य अतिथि जी.एल.एम. कॉलेज, बनमनखी, पूर्णिया के प्राचार्य डॉ. प्रमोद भारतीय रहे। कार्यक्रम में कवियों, साहित्यकारों, शिक्षकों, सामाजिक एवं शैक्षणिक हस्तियों तथा क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
अध्यक्षीय संबोधन में एहसानुल इस्लाम एहसान क़ासमी ने कहा कि कविता और साहित्य किसी भी क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक पहचान को मजबूत करते हैं। उन्होंने ‘अश्क-ए-वफ़ा’ के प्रकाशन को पोठिया के साहित्यिक इतिहास में महत्वपूर्ण शुरुआत बताते हुए नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने के लिए ऐसी गोष्ठियों के निरंतर आयोजन पर बल दिया।
मुख्य अतिथि डॉ. प्रमोद भारतीय ने कहा कि साहित्य मानवीय भावनाओं, संवेदनाओं और सामाजिक चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि सीमांचल के ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है, आवश्यकता उन्हें उचित मंच देने की है।
विधायक क़मरुल हुदा ने भी आफ़ताब अज़हर सिद्दीकी को बधाई देते हुए कहा कि किशनगंज और सीमांचल में साहित्यिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। मौलाना नईमुद्दीन क़ासमी ने ‘अश्क-ए-वफ़ा’ को क्षेत्र की उल्लेखनीय साहित्यिक उपलब्धि बताते हुए कलम को समाज में प्रेम, नैतिकता और सकारात्मक सोच के प्रसार का माध्यम बताया।
काव्य गोष्ठी में डॉ. क़सीम अख़्तर, मुमताज़ नैयर, डॉ. तैयब फ़ुरक़ानी, शहबाज़ मज़लूम परदेसी, इमरान अलीमी शाहिद, आरज़ू साबिर, सईदुर्रहमान, मोहसिन नवाज़ मोहसिन, रौनक मुर्शिदाबादी और सैयद जाफ़र इमाम सहित कई कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
इस अवसर पर डॉ. क़सीम अख़्तर तथा मौलाना अबू सालिक नदवी ने लेखक आफ़ताब अज़हर सिद्दीकी को सम्मान-पत्र (सिपास नामा) भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम के अंत में ‘अश्क-ए-वफ़ा’ का विधिवत विमोचन किया गया। उपस्थित साहित्यकारों एवं गणमान्य लोगों ने लेखक को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि इस पहल से पोठिया और सीमांचल में साहित्यिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।