राज कुमार/किशनगंज
बिहार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण पदाधिकारी संघ (बिस्वा) के आह्वान पर जिले के कल्याण पदाधिकारियों ने अपनी सात सूत्री मांगों के समर्थन में जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता एवं अनुमंडल पदाधिकारी, किशनगंज को ज्ञापन सौंपा।
संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज के कल्याण एवं विकास की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु क्षेत्रीय स्तर पर पर्याप्त संसाधनों एवं अधिकारियों की आवश्यकता है।
वर्तमान में एक ओर कई जिलों एवं अनुमंडलों में कल्याण पदाधिकारियों की भारी कमी है, जिससे योजनाओं के संचालन एवं लाभुकों तक सेवाओं की पहुँच प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर अनेक पदाधिकारी वर्षों से मुख्यालय एवं पटना जिले में पदस्थापित अथवा प्रतिनियुक्त हैं। संघ ने मांग की है कि इस असंतुलन को दूर करने के लिए स्पष्ट एवं पारदर्शी स्थानांतरण एवं पदस्थापन नीति लागू की जाए, ताकि अनुभवी अधिकारियों की सेवाओं का लाभ क्षेत्रीय स्तर पर भी मिल सके। यह मांग संघ की सात सूत्री मांगों में प्रमुख रूप से शामिल है।
ज्ञापन में प्रखंड एवं अनुमंडल स्तर पर कल्याण शाखाओं को मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराने, अनावश्यक विभागीय कार्रवाई से मुक्ति एवं समयबद्ध प्रोन्नति, सरकारी वाहन अथवा निश्चित यात्रा भत्ता, विद्यालय एवं छात्रावास प्रबंधकों की शीघ्र नियुक्ति, संवर्ग नियमावली में सुधार तथा स्थानांतरण प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने की मांग भी की गई है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो राज्य स्तरीय निर्णय के अनुसार कल्याण संवर्ग के पदाधिकारी सांकेतिक विरोध प्रदर्शन सहित आगे की रणनीति अपनाने को बाध्य होंगे।
संघ ने सरकार को स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं हुई तो कल्याण संवर्ग के पदाधिकारी आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। राज्य स्तरीय निर्णय के अनुसार 11 सितंबर को जिले के कल्याण पदाधिकारी काली पट्टी लगाकर सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे और अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे।
संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी मांगें केवल पदाधिकारियों की सुविधा से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से धरातल तक पहुंचाने से जुड़ी हैं। अधिकारियों की कमी और संसाधनों के अभाव को दूर किए बिना योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन चुनौती बना रहेगा।