न्यूज लेमनचूस

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ससुर जी उवाच /अशोक चक्रधर

ससुर जी उवाच डरते झिझकतेसहमते सकुचातेहम अपने होने वालेससुर जी के पास आए,बहुत कुछ कहना चाहते थेपर कुछबोल ही नहीं पाए। वे धीरज बँधाते हुए बोले-बोलो!अरे, मुँह तो खोलो। हमने कहा-जी. . . जीजी ऐसा हैवे बोले-कैसा है? हमने कहा-जी. . .जी ह़महम आपकी लड़की काहाथ माँगने आए हैं। वे बोलेअच्छा!हाथ माँगने आए हैं!मुझे उम्मीद … Read more

पहला पानी –  केदारनाथ अग्रवाल 

कविता पहला पानी गिरा गगन सेउमँड़ा आतुर प्यार,हवा हुई, ठंढे दिमाग के जैसे खुले विचार ।भीगी भूमि-भवानी, भीगी समय-सिंह की देह,भीगा अनभीगे अंगों कीअमराई का नेहपात-पात की पाती भीगी-पेड़-पेड़ की डाल,भीगी-भीगी बल खाती हैगैल-छैल की चाल ।प्राण-प्राणमय हुआ परेवा,भीतर बैठा, जीव,भोग रहा हैद्रवीभूत प्राकृत आनंद अतीव । रूप-सिंधु कीलहरें उठती,खुल-खुल जाते अंग,परस-परसघुल-मिल जाते हैंउनके-मेरे रंग … Read more