ससुर जी उवाच /अशोक चक्रधर
ससुर जी उवाच डरते झिझकतेसहमते सकुचातेहम अपने होने वालेससुर जी के पास आए,बहुत कुछ कहना चाहते थेपर कुछबोल ही नहीं पाए। वे धीरज बँधाते हुए बोले-बोलो!अरे, मुँह तो खोलो। हमने कहा-जी. . . जीजी ऐसा हैवे बोले-कैसा है? हमने कहा-जी. . .जी ह़महम आपकी लड़की काहाथ माँगने आए हैं। वे बोलेअच्छा!हाथ माँगने आए हैं!मुझे उम्मीद … Read more