संवाददाता/बहादुरगंज
बहादुरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत लौचा पंचायत के जानीगाछ बैसा गोपालगंज निवासी मरहूम मुश्ताक आलम का शव बुधवार की रात परिजनों एवं ग्रामीणों की चीख-पुकार के बीच उनके पैतृक घर पहुंचा। शव पहुंचते ही परिवार में मातम पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
पूर्व विधायक मुजाहिद आलम ने बताया कि मुश्ताक आलम का 29 अगस्त 2026 को कुवैत में इंतकाल हो गया था। वे इसी माह 21 अगस्त को रोजगार के सिलसिले में कुवैत गए थे। परिजनों के अनुसार, कुवैत पहुंचने के बाद महज दो दिनों तक धूप में काम करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उनकी मौत हो गई।
मुश्ताक आलम अपने पीछे पत्नी, दो मासूम बच्चों और मां-बाप को छोड़ गए हैं। परिवार के एकमात्र सहारे की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
इधर, परिजनों एवं ग्रामीणों ने विदेश भेजने वाले एजेंट पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मुश्ताक को कुवैत भेजने के बाद उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर उचित व्यवस्था नहीं की गई।
कुवैत में शव को भारत लाने की प्रक्रिया में मृतक के साले समशीर आलम ने भारतीय दूतावास में लगातार भागदौड़ की। इस दौरान गुलशाद राही, सादिक आलम, मेराज समेत अन्य युवाओं ने भी सहयोग किया। काफी प्रयासों के बाद शव को भारत लाया जा सका।
वहीं, बागडोगरा से शव को जानीगाछ स्थित पैतृक घर तक पहुंचाने के लिए कोचाधामन के पूर्व विधायक मुजाहिद आलम की ओर से एंबुलेंस उपलब्ध कराया गया। इसके बाद शव को बुधवार रात गांव लाया गया, जहां गमगीन माहौल में परिजनों एवं ग्रामीणों ने अंतिम दर्शन किए।