कटिहार – आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनिश्री प्रशांत कुमार जी मुनिश्री कुमुद कुमार जी के सान्निध्य में श्रीमती शांति देवी नाहटा का वर्षीतप अभिनंदन समारोह आयोजित हुआ। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा कि तपस्या की अनुमोदना में तप करना कठिन होता है। अरिहंत प्रभु की शक्ति से तपस्या सरल हो जाती है। गुरु की शक्ति तप-त्याग, धर्म-भावना में साहयक होती है।उस शक्ति को महसूस करना चाहिए।
हमेशा अरिहंत प्रभु का नाम स्मरण करें। ये हमारे ऊर्जा के सागर है। हमें कुछ भी करना है तो अरिहंत प्रभु की आज्ञा लेकर कार्य करें। जिनशासन में आज्ञा का बड़ा महत्व है।तप अपने आप में बहुत बड़ी शक्ति है। तपस्या से समस्या दूर होती है। तपस्या से कर्म निर्जरा होती है। शांति देवी नाहटा के प्रति मंगलकामना करता हूं तप साधना में आगे बढ़ते रहे कर्म निर्जरा करके आत्मा को पवित्र बनाएं।
मुनिश्री कुमुद कुमार जी ने कहा कि हलुकर्मी आत्मा में धर्म के प्रति भावना जागृत होती है।हम धर्म में अंतराय न देकर सहयोगी बनें। त्याग एवं त्यागी के प्रति अहोभाव, प्रमोद भाव रखें। धर्म के प्रति सम्यक भाव से कर्म निर्जरा होती है अन्यथा कर्म बंधन हो जाता है। मुनिश्री पारस कुमार जी, मुनिश्री उगमराज जी ने तपस्या में कीर्तिमान बनाया है। तपस्या से धर्मशासन की प्रभावना बढ़ती है, आत्म निर्जरा होती है, जनमानस को प्रेरणा प्राप्त होती है।
हनुमान नाहटा ने बताया कि कटिहार सभा मंत्री राजकुमार पुगलिया, नेपाल बिहार सभा अध्यक्ष विरेंद्र संचेती, तेरापंथ युवक परिषद मंत्री श्रेयांस खटेड़, महिला मंडल से श्रीमती ज्योति छाजेड़, अमित नाहटा, मनोज सुराणा, नाहटा परिवार भाणजीयों, नाहटा परिवार बहुओं,मनोज भंसाली श्रीमती शांति देवी नाहटा, बेंगलुरु से समागत देवेन्द्र नाहटा- गुलाब बांठिया ने गीत एवं वक्तव्य के द्वारा तप अभिनंदन किया। सभा,तेयुप, महिला मंडल द्वारा तपस्विनी शांति नाहटा, सुशील घोषल, सुशील रामपुरिया का अभिनंदन किया गया।