शब ए बारात में अल्लाह के रहमतों का होता है नजूल

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सरफराज आलम/कोचाधामन (किशनगंज)

प्रखंड क्षेत्र में शब-ए-बारात को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों में खुशी है। आज (मंगलवार की रात)‌की रात शब-ए-बारात का एहतमाम किया जाएगा।शब ए बारात से ही पवित्र माह रमजान की तैयारी शुरू हो जाती है।


इस्लामी कैलेंडर के माहे शाबान (आठवीं महीना )की 15 वीं शब (रात)को शब-ए-बारात कहा जाता है इसका अर्थ बुलंद रात है।इस रात को अल्लाह के दरबार में तौबा कबूल की जाती है।रब ताला के जानीब से रहमतों के दरवाजे खोल दिए जाते हैं।नेकियों का मर्तबा बुलंद किया जाता है और इस धरती पर‌ रहमतों और बरकतों का नजूल होता है।बंदों की खताएं (गुनाह)बारगाहे – इलाही में माफ कर दिए जाते हैं।मजहबे इस्लाम में शाबान को पैगंबरे-इस्लाम हजरत मुहम्मद का महीना कहा गया है।


पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सलल्ललाहे अलैहे व सल्लम ने फरमाया है कि शब-ए-बारात की रात को अपने घरों और मस्जिदों में जागा करो और दिन में रोजा रखा खरो।इस पाक रात में अल्लाह पाक अपने शानों शौकत के मुताबिक आसमान से जमीन ( दुनिया) पर रहमतों का नजूल करता है और ऐलान करता है कि है कोई मगफिरत तलब करने वाला।है कोई रोजी मांगने वाला है कोई दुखी इंसान जो मैं उसे दुःख से निजात बख्शूं।यह सिलसिला रात भर जारी रहता है।

पैगंबर ए इस्लाम हजरत मुहम्मद ने फरमाया है कि इस रात को अल्लाह पाक के तरफ से बंदों के नामें आमाल में रोजी-रोटी जिंदगी और मौत और अन्य तमाम काम काज लिख दिया जाता है।शब-ए-बारात मुकद्दश रातों में एक अनमोल रात है जिसका जिक्र पवित्र ग्रंथ कुरान व हदीश में कई जगहों पर आया है। उधर शब ए बारात को लेकर लोगों ने मस्जिद व कब्रिस्तानों की साफ सफाई पूरी कर ली है।

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