राजेश दुबे
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए कृषि कानून के विरोध में जारी आंदोलन के 12 दिन हो गए है । इन 12 दिनों में किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच 5 बार वार्ता हो चुकी है ।उसके बावजूद किसान नेताओ और सरकार के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही है ।किसान हित के नाम पर देश में गंदी राजनीति चरम पर है ।
और कल मंगलवार को किसान संगठनों द्वारा भारत बंद का ऐलान किया गया है ।
भारत बंद को कांग्रेस ,आम आदमी पार्टी ,समाजवादी पार्टी , आरजेडी, सीपीएम,एनसीपी,शिव सेना, टीएमसी सहित अन्य राजनैतिक दलो का समर्थन प्राप्त है ।किसान आंदोलन के बीच अभी तक जो तस्वीरें उभर कर सामने आई है ,उससे साफ तौर पर यह प्रतीत होता है कि देश की विपक्षी पार्टियां किसानों के कंधे पर बंदूक रख कर इस आंदोलन को हवा दे रही है ।और इनका मकसद देश में अराजकता का माहौल पैदा करना मात्र है ना कि इन्हें किसानों के किसी मुद्दे से कुछ लेना देना है ।
किसान आंदोलन में खालिस्तान के समर्थन में नारा लगाया जाना हो या फिर कनाडा के प्रधान मंत्री के द्वारा आंदोलन के समर्थन में बयान देना के साथ साथ ब्रिटेन के सांसदों का पत्र लिखना इस बात को और बल प्रदान करता है कि किसान सिर्फ मोहरे मात्र है ।एक किसान कभी यह नारा नहीं देगा कि ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी ‘ इस आंदोलन की पटकथा का लेखक कोई और है जो पर्दे के पीछे से सारी पटकथा लिख रहा है ।
इस आंदोलन या फिर कह ले कि अराजक माहौल की वजह से देश के जो सही मायने में जरूरत मंद किसान है वो असमंजस की स्थिति में है ।क्योंकि केंद्र सरकार इस कानून के लाभ को अभी तक समझाने में असफल रही है। और इसी का फायदा ये विपक्षी पार्टियां उठा रही है और किसानों को उनके खेत से सड़कों तक ले आई है ।हालाकि केंद्र सरकार के मंत्री और सांसद लगातार मीडिया और सोशल मीडिया पर कानून का लाभ बता रहे है ।कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर हो या फिर स्वयं प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी लगातार यह कह रहे है कि एमएसपी समाप्त नहीं होगा ।
लेकिन यह भी विचारणीय प्रश्न है कि जो सही मायने में किसान है वो कितने प्रतिशत सोशल मीडिया या फिर टीवी चैनल पर समाचार देखते है। सरकार को चाहिए था कि जागरूकता अभियान चला कर कृषि कानून के लाभ से किसानों को अवगत करवाने का कार्य करती ।केंद्र सरकार के पास अभी भी समय है साथ ही बीजेपी के पास कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फौज है ,जिसका उपयोग करके सरकार किसानों तक अपनी बात पहुंचा सकती है ।
देश का आम नागरिक विपक्षी दलो द्वारा आए दिन फैलाए जाने वाले प्रोपेगेंडा से परेशान हो चुके है ।पूरा देश आज कोरोना महामारी की वजह से ऐसे ही परेशान है ।कई महीनों तक जारी लॉक डाउन की वजह से मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारी को जो नुकसान हुआ है उससे उबरने में ना जाने कितने दिन लगेंगे और उसपर ये अराजक माहौल और परेशान करने वाला है ।केंद्र सरकार को पूरे सख्ती के साथ ऐसे लोगो से निपटना होगा ताकि आम आदमी और किसान सुकून से जीवन यापन कर सके ।

























