नए वर्ष में क्या लोगों को मिलेगी यह रेलखंड की नई सौगात.
अररिया /बिपुल विश्वास
पूरे देश में रेलवे के क्षेत्र में नये नये आयाम जुड़ते जा रहें हैं. जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण यह इलाका रेलवे में विकास से कोसों दूर होता जा रहा है. इस इलाके से लंबी दूरी के लिए मात्र दो ट्रेन दिल्ली और कोलकाता के लिए चल रही है. वह भी पूर्व के सरकार के कार्यकाल में चलाया गया था. केंद्र की भाजपा सरकार के समय इस इलाके में रेलवे के क्षेत्र में विकास की बात बेमानी साबित हो रहा है. फारबिसगंज रेलवे स्टेशन पर सहरसा रेलखंड का आमान परिवर्तन कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है. इस बजट में सहरसा फारबिसगंज (111किमी) रेलखंड एवं सकरी निर्मली और झंझारपुर लौकहा(94 किमी) के लिए 200 करोड़ दिए जाने की बात कही जा रही है.फारबिसगंज-सहरसा रेलखंड के आमान परिवर्तन का कार्य दिसंबर 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
परंतु इस रेलखंड के फारबिसगंज के हिस्से में कच्छप गति से चल रहे निर्माण कार्य को देखते हुए रेलवे मंत्रालय यह दावा हवा-हवाई ही लग रहा है. जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण इस इलाके के लोगों में खासा आक्रोश देखा जा रहा है. लोगों को बसों में अधिक राशि खर्च कर सफर करना पड़ रहा है. इस इलाके के लोगों का कहना है की यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि केंद्र व राज्य में बीजेपी गठबंधन की सरकार है. बीजेपी के सांसद और विधायक हैं. लोगों की आंखों पथरा गई है इस रेलखंड के आमान परिवर्तन कार्य पूरा होते देखने के लिए.
वर्षों बीत गए लेकिन जोगबनी से लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन शुरू नहीं हो सका.पटना के लिए एक अदद ट्रेन तक नसीब नहीं है इस इलाके के लोगों को. रेलवे के क्षेत्र में विकास की बात बेमानी साबित हो रहा है.सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की इस नई रेल लाइन के लिए फारबिसगंज में जिस नए प्लेटफार्म का निर्माण होना है.उसकी जिम्मेदारी एनएफ रेलवे की है. जिसके तहत फारबिसगंज के पश्चिमी हिस्से में नए स्टेशन भवन का निर्माण जिसके अंतर्गत एसएम कार्यालय,कंट्रोल रूम,टिकट घर,वेटिंग रूम,वीआईपी लॉनज, आरपीएफ कार्यालय तथा सर्कुलेटिंग एरिया बनना है. कोरोना काल में इस का भी काम ठप पड़ा है. प्लेटफार्म संख्या चार का निर्माण कर लिया गया है.
तथा वाशिंग एपर्न का भी प्रावधान कर दिया गया है. परंतु कोरोना काल में जारी लॉकडाउन के दौरान जब ट्रेनों का आवागमन बंद हो चुका था, ऐसे में प्लेटफार्म संख्या दो और तीन का उन्नयन एवं विस्तारीकरण का काम बिना ट्रैफिक ब्लॉक लिए हुए बड़े आराम से किया जा सकता था. मगर इस समय का सदुपयोग कटिहार मंडल के द्वारा क्यों नहीं किया गया यह समझ से परे है.फारबिसगंज स्टेशन पर निर्मित हो रहे एक और नए फुट ओवर ब्रिज का काम भी धीमी गति से चल रहा है. नए वर्ष में अररिया जिला को रेलवे में सौगात मिलेगी या फिर यूं ही वर्षों वर्ष का इंतजार करना पड़ेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा.
रेलवे के क्षेत्र में इस इलाके में विकास नहीं के बराबर दिख रही है बथनाहा से बीरपुर वर्षों पूर्व ट्रेनें चला करती थी जो अब बंद पड़ गया है वहीं भारत नेपाल सीमा जोगबनी से देश के अन्य हिस्सों के लिए ट्रेनों का परिचालन होता था लेकिन जनप्रतिनिधियों एवं सरकारी उदासीनता के कारण यह इलाका रेलवे में विकास से अछूता रह गया है.






























