धर्म :विधि विधान एवं हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया हरतालिका तीज का त्यौहार

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खोरीबाड़ी, नक्सलबाड़ी व नेपाल के महिलाओं ने किया हरतालिका तीज का व्रत

खोरीबाड़ी /चंदन मंडल

हरतालिका तीज का व्रत खोरीबाड़ी, नक्सलबाड़ी व नेपाल में महिलाओं ने विधि विधान व हर्षोल्लास से साथ मनाया। दिन भर निर्जला उपवास रखने के बाद शाम में महिलाएं सज-धज कर तीज की कथा सुनीं और गौरी-शंकर की पूजा अर्चना की। तीज का पर्व भाद्रपद मास शुक्ल की तृतीया तिथि को मनाने की प्रथा है। मान्यता है कि गिरिराज हिमालय की पुत्री पार्वती ने हरितालिका तीज का व्रत किया था जिस कारण उन्हें भगवान शंकर पति रूप में प्राप्त हुए थी। इसलिए कई क्षेत्रों में कुंवारी कन्या भी तीज का त्योहार मनाती हैं। लेकिन यहां सुहागिन महिलाएं अपनी पति की सलामती एवं मनोकामना पूर्ति के लिए तीज त्योहार मनाती हैं। कहा जाता है कि यह त्योहार मनाने से धन, विवाह, संतान आदि भौतिक सुखों में वृद्धि होती है।


गुरुवार को सुहागिन महिलाओं ने दिनभर निर्जला उपवास रख कर यह व्रत किया तथा भगवान शिव और माता पार्वती उपासना की। पूजन के समय महिलाएं सोलह श्रृंगार से सजीं थीं। मेंहदी लगाने से लेकर सभी तरह के श्रृंगार महिलाएं की थीं। व्रती दिन और रात को उपवास रखीं। वे दूसरे दिन आज शुक्रवार को सुबह पारण करेंगी। शाम में सभी व्रती महिलाएं मंदिरों और घरों में विधि विधान के साथ भोलेनाथ और मां पर्वती की पूजा की। इस दौरान माता पार्वती को सौभाग्य की वस्तुएं अर्पित की गई तथा माता से अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना की। मौसम में मिलने वाले सभी फल के साथ पकवान आदि बनाकर उसका भोग लगाया गया। साथ ही बेलपत्र, फूल, धूप, चंदन आदि से पूजा कीं।

महिलाओं ने स्नान किया तथा पूजा अर्चना की। तीज व्रत को लेकर बाजार में सुबह से ही रौनक थी। कोरोना के बावजूद लोग सुबह से बाजार में फल, मिठाई व पूजन सामग्री आदि की खरीददारी की। पकवान के साथ तीज में सभी तरह के मौसमी फल भी चढ़ाने का रिवाज है। गुड़िया साह और रेणुका साह ने बताया कि घर में सुख, शांति और समृद्धि के साथ-साथ पति के लंबी उम्र की कामना के लिए तीज व्रत कर रही हैं। पूर्णिमा साह ने बताया शादी के बाद से ही वे इस त्यौहार को कर रही हैं। दूसरे पारण के साथ व्रत पूर्ण होता है।






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