केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ प्रदेश में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान अमित शाह ने कहा कि तीन नए आपराधिक कानून देश की न्याय व्यवस्था को अधिक तीव्र, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित (सिटीजन सेंट्रिक) बना रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को इन कानूनों के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
गृह मंत्री ने कहा कि ई-साक्ष्य (e-Sakshya), ई-समन (e-Summon) और i-Prison जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म न्याय प्रक्रिया को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाएंगे। इसके साथ ही सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में अनिवार्य फॉरेंसिक जांच, जीरो एफआईआर (Zero FIR) की व्यवस्था और तकनीक आधारित जांच प्रणाली से अपराधों की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच सुनिश्चित होगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि इन तीन नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से पश्चिम बंगाल में सुशासन को मजबूती मिलेगी और आम नागरिकों को तेजी से न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक नया अध्याय शुरू होगा।
वही उन्होंने भारत बांग्लादेश सीमा का भी जायजा लिया और कहा कि जो सिलीगुड़ी कॉरिडोर पहले की सरकारों में घुसपैठ का गलियारा बन गया था, वह अब सुरक्षित सीमा का पर्याय बन रहा है।
उन्होंने कहा कि आज BSF की उत्तर बंगाल सीमांत की 18वीं वाहिनी की सीमा चौकी जुमागाछ BOP पर वॉच टावर से सीमा चौकी की निगरानी व्यवस्था का अवलोकन किया।
मोदी सरकार ने न केवल सीमाओं पर वॉच टावरों की संख्या बढ़ाई है, बल्कि इन्हें अत्याधुनिक तकनीक से लैस कर सीमा सुरक्षा को और अधिक मजबूत एवं अभेद्य बनाया है।






















