कटनी में बड़ा ऑपरेशन: मुंबई ले जाए जा रहे 162 बाल मजदूरों का रेस्क्यू, किशनगंज पहुंचाए गए सभी बच्चे

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10 अप्रैल को मध्य प्रदेश के कटनी में बच्चों को किया गया था रेस्क्यू


किशनगंज /प्रतिनिधि


मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर बाल मजदूरी के लिए अवैध रूप से ले जाए जा रहे 162 बच्चों को एक बड़ी कार्रवाई में मुक्त कराया गया। शनिवार को कटनी जीआरपी और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम इन बच्चों को सुरक्षित किशनगंज रेलवे स्टेशन लेकर पहुंची।यहां उन्हें उनके परिजनों और संबंधित जिलों की चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंप दिया गया।

जानकारी के अनुसार बीते 10 अप्रैल को पटना से मुंबई जा रही एक एक्सप्रेस ट्रेन जब मध्य प्रदेश के कटनी स्टेशन पर रुकी, तो वहां मौजूद रेल पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम को इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को एक साथ देखकर संदेह हुआ। टीम ने तुरंत ट्रेन में चढ़कर गहन पड़ताल की, जिसमें यह पुष्टि हुई की इन बच्चों को बहला-फुसलाकर बाल मजदूरी के लिए मुंबई ले जाया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम ने सभी 162 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया।

​किशनगंज पहुंचकर बच्चे थे उत्साहित

किशनगंज रेलवे स्टेशन पहुंचने पर सभी बच्चों को उनके संबंधित जिलों की चाइल्ड हेल्पलाइन टीमों के सुपुर्द किया गया। रेस्क्यू किए गए बच्चों में सबसे ज्यादा अररिया जिले के 144 बच्चे
सुपौल जिले के 16 बच्चे,किशनगंज जिले के 1 और पूर्णिया जिले के भी 1 बच्चे शामिल है। किशनगंज पहुंचकर अपने अभिभावकों से मिलने की खुशी बच्चों को उत्साहित कर रही थी।

वहीं किशनगंज निवासी बच्चे को रेल पुलिस, आरपीएफ और चाइल्ड हेल्पलाइन की मौजूदगी में उसके अभिभावकों को सुरक्षित सौंप दिया गया। बाकी बच्चों को संबंधित जिलों की चाइल्ड हेल्पलाइन के संरक्षण में उनके घर भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।

अभियान में ये थे शामिल

​इस अभियान में कटनी रेल पुलिस, किशनगंज के रेल थानाध्यक्ष, आरपीएफ इंचार्ज एचके शर्मा और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम की सक्रिय भूमिका रही। इस घटना ने एक बार फिर सीमांचल क्षेत्र से बच्चों के पलायन और बाल तस्करी के संगठित गिरोहों के सक्रिय होने की ओर संकेत दिया है, जिससे स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया है।

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