किशनगंज/पोठिया/राज कुमार
शुक्रवार को पोठिया प्रखंड के छत्तरगाच्छ कचहरी मैदान में जमीयत उलेमा ए हिंद के तत्वावधान में जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व जमीयत उलेमा ए हिंद के जनरल सेक्रेटरी कारी जावेद इकबाल ने किया। ठंड के मौसम को देखते हुए यतीम, गरीब, विधवा, मिसकिन, बुजुर्ग और कमजोर लोगों को चिन्हित कर उच्च गुणवत्ता के कंबल वितरित किए गए।
इस सेवा कार्य में जमीयत उलेमा ए हिंद के छत्तरगाच्छ पंचायत अध्यक्ष डॉ अब्दुल मन्नान और पंचायत सेक्रेटरी हाफिज तारिक की भूमिका सराहनीय रही। दोनों के समन्वय और मार्गदर्शन में वास्तविक जरूरतमंदों की पहचान की गई, ताकि मदद सही हाथों तक पहुंच सके। कंबल पाकर जरूरतमंदों के चेहरों पर राहत और संतोष साफ नजर आया।
डॉ अब्दुल मन्नान ने कहा कि जमीयत उलेमा ए हिंद का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है। ठंड के मौसम में कंबल किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन आगे भी इसी तरह जरूरतमंदों की मदद करता रहेगा।
वहीं पंचायत सेक्रेटरी हाफिज तारिक ने कहा कि कारी जावेद इकबाल वर्षों से लगातार खिदमत ए खल्क का कार्य कर रहे हैं। वे बिना किसी भेदभाव के इंसानियत के आधार पर सेवा करते हैं। गरीबों और बुजुर्गों के लिए उनका यह प्रयास समाज को सकारात्मक दिशा देता है।
कार्यक्रम में नायाब सदर कारी महबूब,बाबा अब्दुल करीम, वार्ड सदस्य संजीव लाला राय, सुरेश प्रसाद गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। बाबा करीम और कारी महबूब नें बताया कि छत्तरगाच्छ के अलावा परलाबाड़ी, पनासी, पहाड़कट्टा, शीतलपुर और कोल्था पंचायत समेत कई इलाकों में कंबल वितरण किया गया है। इस पहल से क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोग इसकी खुले दिल से सराहना कर रहे हैं।
कारी जावेद इकबाल ने अपने संबोधन में कहा कि वे मजहब से ऊपर उठकर इंसानियत की बुनियाद पर काम करते हैं। उनकी सामाजिक सेवाएं बिहार के साथ साथ पश्चिम बंगाल तक फैली हुई हैं। उन्होंने छत्तरगाच्छ की धरती को इल्मी रूप से अहम बताते हुए कहा कि यह बड़े आलिम ए दीन हजरत मुफ्ती शबीह अख्तर साहब की सरजमीं है, जिन्हें महबूबुल उलेमा का खिताब मिला है।
उन्होंने कहा कि हजरत मुफ्ती शबीह अख्तर इस समय असम में शैखुल हदीस के पद पर कार्यरत हैं और सीमांचल सहित पूरे देश में उनकी पहचान है। कारी जावेद इकबाल ने छत्तरगाच्छ के लोगों से अपील की कि ऐसे बुजुर्ग आलिम की कद्र करें और उनकी इल्मी विरासत को संजोकर रखें।
कार्यक्रम के अंत में स्थानीय लोगों ने जमीयत उलेमा ए हिंद, डॉ अब्दुल मन्नान, हाफिज तारिक और कारी जावेद इकबाल के सेवा कार्य की प्रशंसा करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।



























