किशनगंज/नेपाल। सुदूर ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाशाली बाल साहित्यकार संस्कृति चौधरी को नेपाल में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। मात्र दस वर्ष की उम्र में अपनी पहली बाल कथा पुस्तक “शरारती बंदर मन्कू” लिखकर चर्चा में आई संस्कृति ने अपनी लेखनी से साहित्य जगत में अलग पहचान बनाई है।
संस्कृति की पहली पुस्तक “शरारती बंदर मन्कू” को पाठकों ने खूब सराहा। उनकी साहित्यिक प्रतिभा और उपलब्धियों को देखते हुए उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया है।
संस्कृति ने बताया कि जुलाई माह में उनकी दो और पुस्तकें प्रकाशित होने वाली हैं। इनमें अंग्रेजी भाषा में बाल कथाओं का संग्रह और हिंदी में “संस्कार: द सीड्स ऑफ गुड वैल्यूज” नामक पुस्तक शामिल है। यह पुस्तक बच्चों में नैतिक मूल्यों, संस्कार और अच्छे विचारों के विकास पर आधारित है।
वर्तमान में संस्कृति चौधरी ताराचंद धानुका एकेडमी में कक्षा सातवीं की छात्रा हैं। पढ़ाई के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में उनकी निरंतर सक्रियता और उपलब्धियों ने क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है।
सुदूर गाँव की इस नन्ही साहित्यकारा की उपलब्धि पर क्षेत्र के लोगों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं। संस्कृति की सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा, मेहनत और लगन के बल पर छोटे से गाँव से निकलकर भी बड़े मंचों पर पहचान बनाई जा सकती है।




























