किशनगंज/विजय कुमार साह
टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत के सुहिया गांव के परंपरागत मूर्ति कलाकार इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। सदियों से चली आ रही इस कला को जीवित रखने वाले कारीगर आज बढ़ती महंगाई और घटते मेहनताने के बीच अपनी आजीविका बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
गांव के प्रसिद्ध मूर्ति कलाकार जगदीश प्रसाद साह, परमेश्वर प्रसाद साह, धीरज कुमार साह, पंकज कुमार साह सहित अन्य कारीगरों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि सरस्वती पूजा को लेकर वे दिन-रात मेहनत कर मां शारदे की प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं, लेकिन बढ़ती लागत के अनुपात में उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है।
कलाकारों का कहना है कि मूर्ति निर्माण में लगने वाली मिट्टी, बांस, भूसा, रंग, साज-सज्जा सामग्री और अन्य कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहले स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध होने वाली मिट्टी अब खरीदकर लानी पड़ती है, जिससे लागत कई गुना बढ़ गई है।
इसके बावजूद पूजा समितियों का बजट सीमित होने के कारण कलाकारों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाता।मूर्ति कलाकार जगदीश प्रसाद साह ने बताया कि मां शारदे की एक प्रतिमा को तैयार करने में लगभग 20 दिनों का समय लग जाता है। सुबह से देर रात तक लगातार मेहनत करनी पड़ती है, तब जाकर प्रतिमा साकार होती है। उन्होंने कहा कि अब दो दिनों में प्रतिमा पूरी हो जाएगी, लेकिन जो आमदनी होती है, उससे परिवार का खर्च चलाना बेहद कठिन हो गया है। वहीं परमेश्वर प्रसाद साह ने कहा कि मूर्ति निर्माण सिर्फ काम नहीं, बल्कि उनकी पहचान और परंपरा है, लेकिन मौजूदा हालात में इस पेशे से जीवनयापन करना मुश्किल होता जा रहा है।
धीरज कुमार साह और पंकज कुमार साह ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाली पीढ़ी इस पारंपरिक कला से दूर हो जाएगी। पंकज कुमार साह ने कहा कि बाजार में पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) से बनी सस्ती मूर्तियों की भरमार हो गई है, जिससे मिट्टी की मूर्तियां बनाने वाले कलाकारों को और नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पीओपी मूर्तियों के कारण उनकी मेहनत की मजदूरी तक नहीं निकल पाती।
मूर्ति कलाकारों ने सरकार से मांग की है कि परंपरागत कारीगरों के लिए विशेष योजना, अनुदान या आर्थिक सहायता की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके और उनकी कला को संरक्षण मिल पाए। कलाकारों का कहना है कि मां शारदे की कृपा से उन्हें अब भी उम्मीद है कि एक दिन उनके हालात सुधरेंगे और उनकी मेहनत व कला को समाज और सरकार से उचित सम्मान मिलेगा।



























