प्रेरणा दायक कहानी :ईश्वर पर यकीन

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कहानी /डेस्क

ईश्वर और सद्गुरु पर यकीन


एक बहुत पुरानी कथा है। एक राजा निसन्तान था। उसके सलाहकारों ने तांत्रिकों से इस बारे में परामर्श लिया।
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सुझाव मिला किसी बच्चे की बलि दी जाए, तो राजा को पुत्र की प्राप्ती हो जायेगी।
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राज्यभर में मुनादी की गई, “जो अपना बच्चा देगा, उसे बहुत सा धन दिया जाएगा।”
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एक गरीब परिवार में कई बच्चें थे। एक बच्चा ऐसा भी था, जो ईश्वर पर आस्था रखता था तथा सन्तों के संग सत्संग में ज्यादा समय देता था।
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परिवार को लगा कि इसे राजा को दे दिया जाये, क्योंकि ये कुछ काम नहीं करता। हमारे किसी काम का भी नहीँ है। इसके बदले बहुत सा धन मिल जाएगा।
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परिवार ने ऐसा ही किया गया। बच्चा राजा को दे दिया गया।
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राजा के तात्रिकों द्वारा बच्चे की बलि की तैयारी हो गई। राजा को भी बुलाया गया।
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बच्चे से पूछा गया कि तुम्हारी आखरी इच्छा क्या है? क्योंकि आज तुम्हारे जीवन का अन्तिम दिन है।
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बच्चे ने कहा कि ठीक है मेरे लिये रेत मगा दिया जाये, रेत लाया गया।
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बच्चे ने रेत से चार ढ़ेर बनाये और एक-एक करके रेत के तीन ढ़ेर को तोड़ दिया और चौथे के सामने हाथ जोड़कर बैठ गया।
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फिर बच्चे ने कहा कि अब जो करना है करें।
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ये सब देखकर तॉत्रिक डर गये, बोले “ये तुमने क्या किया है पहले बताओ।”
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राजा ने भी पूछा, तो बच्चे ने कहा कि पहली ढ़ेरी मेरे माता-पिता की है, मेरी रक्षा करना उनका कर्तव्य था, पर उन्होंने पैसे के लिये मुझे बेच दिया। इसलिये मैंने ये ढ़ेरी तोड़ी।
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दूसरा मेरे सगे-सम्बन्धियों का था, उन्होंने भी मेरे माता-पिता को नहीँ समझाया।
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तीसरा आपका है, क्योंकि राज्य के सभी इंसानों की रक्षा करना राजा का ही काम होता है, पर राजा ही मेरी बलि देना चाह रहा है। इसी लिए तीसरी ढ़ेरी भी मैंने तोड़ दी।
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अब सिर्फ मेरे सद्गुरु और ईश्वर पर मुझे भरोसा है, इसलिये ये एक ढ़ेरी मैंने छोड़ दी है।
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राजा ने सोचा कि पता नहीं बच्चे की बलि से बाद भी पुत्र प्राप्त हो या न हो। क्यों ना इस बच्चे को ही अपना पुत्र बना ले, इतना समझदार और ईश्वर भक्त बच्चा है। इससे अच्छा बच्चा कहा मिलेगा।
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राजा ने उस बच्चे को अपना बेटा बना लिया और राजकुमार घोषित कर दिया।
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कहानी का भाव कि जो ईश्वर और सद्गुरु पर यकीन रखते हैं उनका बाल भी बाका नहीँ होता है।






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