रेतुआ नदी के कटाव से उजड़े परिवार अब भी आश्रय भवन में, पुनर्वास की मांग

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किशनगंज /विजय कुमार साह

टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र के चिल्हनियां पंचायत अंतर्गत सुहिया हाट स्थित रेतुआ नदी का कटाव विगत वर्ष 2024 में कई परिवारों पर कहर बनकर टूटा था। विनाशकारी बाढ़ और तेज धार ने दर्जनों घर बह गए थे, जिससे कई परिवार बेघर होकर मटियारी पंचायत स्थित बाढ़ आपदा भवन में शरण लेने को विवश हो गए।आज भी रामगुनी साह, शिवा सहनी, शत्रुघन कुमार साह, नागेश्वर साह, भोला साह सहित आधा दर्जन से अधिक परिवार अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ आपदा भवन में किसी तरह जीवन बिता रहे हैं।

इन परिवारों के पास न अपनी जमीन है, न ही पक्के घर की कोई उम्मीद।कटाव पीड़ित नागेश्वर साह और शिवा सहनी बताते हैं कि उन्होंने सीओ शशि कुमार को कई बार आवेदन दिया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।


शिवा सहनी ने भावुक होकर कहा—“अंचल कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते थक गया। आखिरकार रोज़गार की तलाश में राजस्थान चला आया हूँ। लेकिन परिवार अब भी आपदा भवन में ही जिंदगी काट रहा है। न जाने कब तक यह पीड़ा झेलनी पड़ेगी। इस संबंध में अंचल अधिकारी शशि कुमार ने कहा कि राजस्व कर्मचारी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। “जल्द ही विस्थापित परिवारों को जमीन मुहैया कराकर उनका पुनर्वास कराया जाएगा।

बेघर परिवारों की हालत बेहद दयनीय है। बाढ़ आश्रय भवन में रहकर वे असुरक्षा और असुविधा झेलते हुए जिंदगी गुजार रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाता, तो इन परिवारों का भविष्य गहरे अंधकार में डूब जाएगा। कटाव पीड़ितों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से स्थायी जमीन उपलब्ध कराने और शीघ्र पुनर्वास सुनिश्चित करने की मांग की है।

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