नीतीश-पुत्र निशांत भी राहुल की राह पर !

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नीतीश-पुत्र निशांत को पूरी जदयू 15 अप्रैल को बिहार में शपथ लेने वाली नई सरकार में उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए मनाने में जुटी हुई है और नीतीश-पुत्र निशांत हैं कि मानते ही नहीं ! यदि निशांत डिप्टी सीएम नहीं बनते हैं, तो जदयू को बिहार में प्रासंगिक और अपरिहार्य बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

जदयू संगठन और जदयू के वरिष्ठ नेताओं को बखूबी पता है कि जदयू नीतीश कुमार की बनाई हुई पार्टी है और नीतीश के बगैर जदयू को एकजुट रखना बहुत मुश्किल होगा। नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का एक बड़ा कारण उनका स्वास्थ्य है।

नीतीश विहीन जदयू की कल्पना ही जदयू नेताओं को सकते में डाल रही है। इसलिए जदयू संगठन और इसके वरिष्ठ नेता निशांत को ‘नीतीश की छाया ‘ के रूप में अपने साथ रखना चाहते हैं और चाहते हैं कि निशांत डिप्टी सीएम की कुर्सी संभाल लें ताकि सत्ता के माध्यम से पार्टी एकजुट रहे।

सर्वविदित है कि वर्ष 2009-2014 के बीच केन्द्र की यूपीए – 2 सरकार में राहुल गांधी चाहते, तो प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन राहुल ने अवसर को जानबूझ कर यह कहकर गंवा दिया कि वे अभी देश में घूमकर कांग्रेस संगठन के लिए काम करते हुए अनुभव प्राप्त करना चाहते हैं। और, राहुल की इस भूल या चूक का खामियाजा न केवल स्वयं राहुल गांधी, अपितु पूरी कांग्रेस आज तक भुगत रही है।

पुरानी कहावत है – ‘शहर सिखाए कोतवाली ‘। सत्ता एक ऐसी कुंजी है जिसके माध्यम से हर चीज साधी जा सकती है। अनुभवहीन व्यक्ति भी सत्तारूढ़ हो जाता है, तो सरकार चलाने का हुनर सीख जाता है। इतिहास गवाह है कि राजे-रजवाड़े के दौर में भी कई नाबालिग राजकुमारों को जब मुकुट पहनाया गया, तो उनमें से कई सफल हुए।

वर्ष 2009-2014 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने चाहा था कि राहुल गांधी पीएम बन जाएं। लेकिन, राहुल गांधी नहीं तैयार हुए और प्रधानमंत्री बनने का सुनहरा अवसर गंवाकर अपने गांधी-परिवार और कांग्रेस को केन्द्र की सत्ता से दूर कर दिया। अब कांग्रेस के लिए केंद्र की सत्ता दूर की कौड़ी साबित हो रही है।

15 अप्रैल, 2026 को नीतीश-पुत्र निशांत भी यदि राहुल की राह पर चलते हुए नई सरकार में उप मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं लेते हैं, तो बिहार में नीतीश की जदयू के लिए भविष्य की राह आसान नहीं होगी।

त्वरित टिप्पणी :
प्रो.(डॉ.) सजल प्रसाद
किशनगंज।

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