आईए तम्बाकूमुक्त समाज बनाने का संकल्प लें – राजेश कुमार सिंह
कटिहार – तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यह उपभोग करनेवाले के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।यह एक धीमा जहर है। जो इसके उपभोग करनेवाले के शरीर को अन्दर ही अन्दर खोखला बनाकर घातक बीमारियों का शिकार बना देता है।अनेक बार तंबाकू जनित घातक बीमारियों के कारण आदमी को असमय मौत का ग्रास बनना पड़ता है, इसलिए तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों के बारे मे आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य तंबाकू सेवन से होनेवाले घातक दुष्प्रभावों के प्रति जन जागरूकता फैलाना है ।

तंबाकू एक प्रकार के निकोटिनिया प्रजाति के पेड़ के पत्तों को सुखाकर नशा करनेवाली वस्तु बनायी जाती है। प्रतिबंध के बावजूद तंबाकू के कई उत्पाद उपलव्ध हैं।दुनिया का हर तीसरा कैंसर मरीज तंबाकू का सेवन करता है।एक अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष तकरीबन मिलियन लोग इसके कहर से संसार छोड़ जाते हैं। अनुमंडलीय अस्पताल मनिहारी के उपाधीक्षक डॉ. ब्रजेश नंदन के अनुसार तंबाकू में कई प्रकार के रासायनिक पदार्थ होते हैं। जो हमारे शरीर के लिए बेहद हानिकारक होते हैं।
निकोटिन, हाईड्रोजन -साईनाईड, फार्मेडिहाईड, सीसा,आर्सेनिक की अधिकता, बेंजीन, कार्बन-मोनोआक्साइड आदि जहरीले रासायनिक – यौगिक तंबाकू मे शामिल होते हैं। जो मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।इससे महिलाओं मे प्रजन्न संबंधी समस्या, गर्भस्थ शिशु के लिए खतरा, हृदय संबंधी बीमारी, दमा, आंखों की रोशनी कम होना, अंधापन,मोतियाबिंद, लिवर कैंसर,फेफड़े का कैंसर, मुंह का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो जाती हैं।
उन्होने तंबाकू सेवन से होनेवाली घातक बीमारियों के प्रति सचेत करते हुए आमजन से इससे दूर रहने की अपील की है। स्वयंसेवी संस्था अभिलाषा परिवार के सचिव एवं किशोर न्याय परिषद के न्याय मंडल के पूर्व सदस्य एवं वर्तमान में अध्यक्ष बाल कल्याण समिति कटिहार राजेश कुमार सिंह ने युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के प्रति चिंता जताई है।उन्होने भी कहा है कि केवल सरकार के स्तर पर महज कानून बना देने से इस समस्या से निजात नहीं पाया जा सकता ।
सामुहिक सामाजिक व्यापक जनचेतना लाकर हम युवाओं को नशे की दलदल में जाने से बचा सकते हैं। जानकारी दी कि आईने मे तंबाकू नियंत्रण,तंबाकू जनित दुष्प्रभावों से निपटने तथा लोगों को इसके घातक दुष्प्रभावों से बचाने को लेकर देशभर मे राष्ट्रीय – तंबाकू – नियंत्रण कानून( वर्ष 2003 से प्रभावी है।इसके तहत सार्वजनिक स्थलों पर धुम्रपान निषेध, सिगरेट तथा किसी तंबाकू उत्पाद के विज्ञापन का निषेध, शैक्षणिक संस्थानों की सौ गज की परिधि मे तंबाकू सेवन का निषेध, सभी तंबाकू उत्पादों पर सचित्र स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी का प्रवधान है।
कोटपा के तहत,सार्वजनिक स्थलों पर धुम्रपान करने,खुलेआम तंबाकू से संबंधित सामग्री बेचने पर कार्रवाई का प्रावधान है। प्रावधानों का उल्लंघन करते पकड़े जाने पर अर्थदंड और कारावास तक का प्रावधान है।भारत सरकार ने तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु वर्ष 2007 मे राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम एनटीसीपी का शुभारंभ किया।इस कार्यक्रम का उद्देश्य तंबाकू नियंत्रण कानून और तंबाकू के उपयोग से होनेवाले घातक प्रभावों के बारे मे अधिक-से -अधिक जागरूकता प्रसारित करना है।























