बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय द्वारा आज ऊर्जा ऑडिटोरियम, राजवंशी नगर, पटना में एफ.सी.एम. (फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज) थेरेपी पहल (फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज फॉर एनीमिया प्रबंधन) कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।
कार्यक्रम के दौरान राज्य की चिन्हित 760 (सभी जिलों से चिन्हित 20-20) महिलाओं को एफ.सी.एम. इंजेक्शन प्रदान किया गया। वर्तमान में राज्य के पास लगभग 2 लाख डोज उपलब्ध है।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार हो रहा है और आधुनिक तकनीक के माध्यम से आमजन तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही है।
यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व एवं दिशा-निर्देशन में राज्य में मुफ्त दवा नीति अंतर्गत आवश्यक दवाओं की सूची में समय की मांग एवं आवश्यकता के अनुसार नई-नई औषधियों को शामिल किया जाता रहा है। इसी कड़ी में दिसम्बर, 2025 में फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) को भी आवश्यक दवाओं की सूची में सम्मिलित करते हुए दर अनुबंध किया गया और अब जिलावार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिसे निर्बाध रूप से सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बिहार में लगभग 64 प्रतिशत गर्भवती महिलायें एनीमिया से प्रभावित है, जिसे दूर करना हमारी प्राथमिकता है। मंत्री श्री पाण्डेय ने निर्देश दिया कि आगामी एक माह के भीतर इस सेवा को प्रखंड स्तर तक के अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाए, ताकि आमजन अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों में ही इसका लाभ उठा सकें।
उन्होंने कहा कि एनीमिया एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती है, जिसका प्रभाव विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों में अधिक देखा जाता है। राज्य सरकार एनीमिया के प्रभावी नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि एफ.सी.एम. (फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज) थेरेपी के माध्यम से गंभीर एनीमिया से ग्रसित मरीजों को त्वरित, सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे हीमोग्लोबिन के स्तर में शीघ्र सुधार संभव होगा।
माननीय मंत्री ने कहा कि यह पहल “एनीमिया मुक्त बिहार” की दिशा में एक सशक्त कदम है। उन्होंने बताया कि एनीमिया विशेषकर गर्भवती महिलाओं में कमजोरी का कारण बनता है, जिससे नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
ऐसे में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए एफ.सी.एम. थेरेपी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस थेरेपी के तहत आयरन की पूर्ति इंजेक्शन के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से की जाती है, जो पारंपरिक आयरन गोलियों की तुलना में अधिक लाभकारी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 तक लाना तथा शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाना राज्य सरकार का लक्ष्य है, जिसमें FCM थेरेपी सहायक सिद्ध होगा। स्वास्थ्य विभाग इन लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु सतत प्रयासरत है।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि एफ.सी.एम. थेरेपी को सुलभ ट्रैक से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए कर्मियों को प्रशिक्षण, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ करने तथा संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही, ग्रामीण स्तर तक जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।
इस अवसर पर श्री लोकेश कुमार सिंह, सचिव, स्वास्थ्य विभाग, श्री अमित कुमार पाण्डेय, कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, श्री कुमार गौरव, अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, डॉ. अनुपमा सिंह, अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, श्री अमिताभ सिंह, आप्त सचिव, स्वास्थ्य मंत्री, श्री राजेश कुमार, प्रशासी पदाधिकारी, राज्य स्वास्थ्य समिति, श्री देवेंद्र खंडाइत, गेट्स फाउंडेशन सहित राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार एवं पिरामल फाउंडेशन के सभी पदाधिकारी/कर्मी शामिल हुए। कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के सिविल सर्जन सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी जुड़े रहे।




























