संवाददाता/ किशनगंज
एआईएमआईएम बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने
केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है ।किशनगंज शहर में निजी समारोह में शिरकत करने पहुंचे अख्तरुल ईमान ने ठाकुरगंज निवासी मौलाना तौसीफ रजा मजहरी की बरेली में हुई मौत को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में “नफरत की खेती” की जा रही है, जिसका असर अब दिखने लगा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा की राजनीति “बांटो और राज करो” की रही है। उनके मुताबिक, धार्मिक ध्रुवीकरण के जरिए समाज में विभाजन पैदा किया जा रहा है और इसी के सहारे सत्ता हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि इन दलों के पास भविष्य की कोई ठोस राजनीतिक योजना नहीं है, इसलिए हिंदू-मुस्लिम के नाम पर उन्माद फैलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि समाज को तोड़ने का नाम भारतीय जनता पार्टी है।श्री ईमान ने एक बार फिर से विवादित बाबरी मस्जिद और गुजरात दंगों का जिक्र करते हुए भाजपा पर लाशों के ऊपर चढ़ कर सत्ता तक पहुंचने का आरोप लगाया ।उन्होंने कहा कि मुसलमानों के खून से ही इनकी खेती हरी भरी और आबाद है ।उन्होंने कहा कि मुसलमानों को निशाना बनाना इनकी रणनीति में शामिल है।
अख्तरुल इमान ने उदाहरण देते हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस और गुजरात दंगों का जिक्र किया और कहा कि ऐसी घटनाओं ने देश की सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने महंगाई, गिरती अर्थव्यवस्था और रोजगार के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।
पश्चिम बंगाल और असम की राजनीति का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान सांप्रदायिक बयानबाजी कर समाज को बांटने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति देश की एकता और ऐतिहासिक विरासत के खिलाफ है।श्री ईमान ने वंदे मातरम को लागू करने पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे सर्वोच्च्य न्यायालय के निर्णय का उल्लंघन बताया ।
दिल्ली में बिहारी मजदूर की मौत के मामले पर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बिहार के मजदूर देशभर में मेहनत कर शहरों को खड़ा कर रहे हैं, लेकिन उनके साथ हिंसा और अपमान की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई की मांग की।
इस दौरान उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के एक कथित बयान पर भी नाराजगी जताई और कहा कि किसी भी व्यक्ति की मौत को हल्के में लेना इंसानियत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए संवेदनशीलता और सामाजिक मर्यादा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।




























