बेणुगढ़ बैसाखी मेला: आस्था, श्रद्धा और भाईचारे का अद्भुत संगम

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टेढ़ागाछ (किशनगंज): विजय कुमार साह


किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत ऐतिहासिक बेणुगढ़ में बैसाखी पर्व के अवसर पर बुधवार, 15 अप्रैल को आयोजित एक दिवसीय भव्य मेले में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा।महाभारत काल से जुड़े लगभग 180 एकड़ में फैले प्राचीन टीले पर स्थित बाबा बेणु महाराज का मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। मेले के दौरान “जय बाबा बेणु महाराज” के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में सराबोर रहा।

मान्यता है कि बाबा बेणु महाराज के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। यही कारण है कि यहां न केवल स्थानीय बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों, यहां तक कि नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस मेले की विशेषता इसकी गंगा-जमुनी तहजीब है, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग एक साथ श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करते हैं।


इसी कड़ी में नसीमा खातून नामक एक मुस्लिम महिला ने अपनी बहू के लिए संतान प्राप्ति की कामना करते हुए बाबा के दरबार में माथा टेका। उन्होंने मन्नत पूरी होने पर अगले बैसाखी मेले में ₹5000 नगद एवं एक छागर (बकरा) चढ़ाने का संकल्प लिया। यह दृश्य मेले में सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल बनकर उभरा। मेले के सफल आयोजन को लेकर प्रशासन और मेला कमेटी द्वारा व्यापक तैयारियां की गई थीं।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर के चारों ओर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी। वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाते हुए सभी बाइक चालकों को बाहर ही वाहन खड़ा करने के निर्देश दिए गए, जिससे जाम की समस्या से राहत मिली।


सुरक्षा व्यवस्था का जायजा प्रखंड विकास पदाधिकारी अजय कुमार, अंचल अधिकारी पवन कुमार तथा इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष मो. इजहार आलम ने संयुक्त रूप से लिया।अधिकारियों ने बताया कि पूरे मेला क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती की गई है और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पूरे परिसर की निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।


प्रखंड विकास पदाधिकारी अजय कुमार ने बताया कि मेले को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे भीड़ को नियंत्रित करने में आसानी हो रही है। मेला कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर मुक्ति प्रसाद दास ने बताया कि इस वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के आने की भीड़ थी। उन्होंने कहा कि कमेटी द्वारा स्वयंसेवकों (वॉलंटियर) की तैनाती की गई है, जो श्रद्धालुओं की सहायता और मार्गदर्शन कर रहे हैं। साथ ही, मेला परिसर में एक नियंत्रण कक्ष (कार्यालय) भी बनाया गया है, जहां से पूरे आयोजन की मॉनिटरिंग की जा रही है।मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

धार्मिक वातावरण, सुसज्जित परिसर और सुव्यवस्थित व्यवस्था ने मेले की गरिमा को और बढ़ा दिया। पूर्व प्रोफेसर मुक्ति प्रसाद दास ने कहा कि महाभारत काल से जुड़े इस स्थल की अपनी एक विशेष आध्यात्मिक शक्ति है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां अदृश्य शक्तियां इस गढ़ की रक्षा करती हैं और सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। यही विश्वास इस मेले को हर वर्ष और अधिक भव्य बनाता है।
कुल मिलाकर, बेणुगढ़ बैसाखी मेला न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक बनकर उभरा है।

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