आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से पोठिया में तबाही, सैकड़ों किसानों की फसल बर्बाद, मुआवजे की मांग तेज

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पोठिया/किशनगंज/राज कुमार

पोठिया प्रखंड में शुक्रवार की रात आई तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी। कुछ ही देर में खेतों का मंजर बदल गया। जहां तक नजर गई, गिरी हुई फसलें और बर्बादी का दृश्य दिखा। मेहनत, उम्मीद और पूंजी सब एक साथ मिट्टी में मिल गए।


प्रखंड के फाला, दुबनोची, मिर्जापुर, कुस्यारी, गोरुखाल, सारोगोरा, कोल्था, बुढ़नई, शीतलपुर सहित कई पंचायत इस आपदा की चपेट में आ गए। कई जगहों पर ओले इतने तेज गिरे कि खड़ी फसल सीधी जमीन पर गिर गई। तेज हवा ने मक्का और गेहूं की बालियों को तोड़ दिया। बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया, जिससे आलू और अनानास की फसल सड़ने की कगार पर है।


सबसे अधिक नुकसान मक्का, गेहूं, आलू और अनानास की फसलों को हुआ है। खेतों में खड़ी तैयार फसल कुछ दिनों में काटनी थी, लेकिन इससे पहले ही प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ तबाह कर दिया। कई किसानों के खेतों में अब सिर्फ टूटे पौधे और पानी से भरे गड्ढे रह गए हैं।


कुस्यारी पंचायत के पानबाड़ा वार्ड 10 निवासी किसान मोहम्मद नइमुद्दीन ने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ में मक्का की खेती की थी। इसके लिए उन्होंने केसीसी लोन लेकर करीब तीन लाख रुपये खर्च किए थे। उन्होंने कहा कि फसल लगभग तैयार थी, कुछ ही दिनों में कटाई होने वाली थी। लेकिन आंधी और ओलावृष्टि ने पूरी फसल गिरा दी। अब खेत में कुछ भी बचा नहीं है। परिवार की पूरी आजीविका इसी खेती पर निर्भर थी। अब घर चलाना भी मुश्किल हो गया है।


वही फाला पंचायत के किसान हरिनारायण की कहानी भी अलग नहीं है। उन्होंने दस बीघा में मक्का की खेती की थी। इसके लिए समूह लोन लेकर करीब दो लाख रुपये लगाए थे। पत्नी और बच्चों के साथ मिलकर दिन-रात मेहनत की थी। लेकिन एक रात में सारी मेहनत खत्म हो गई। अब उनके सामने कर्ज चुकाने और परिवार चलाने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।


क्षेत्र के मुकेश कुमार सिंह, अशोक कुमार, अब्दुल शाहिद, मोहम्मद बारीक, मोहम्मद मोकीम, राहुल कुमार, प्रदीप कुमार सहित सैकड़ों किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। कई किसानों ने बताया कि यह नुकसान 40 प्रतिशत से अधिक है। कुछ जगहों पर तो 60 से 90 प्रतिशत तक फसल नष्ट हो गई है।


ग्रामीणों के अनुसार ओलावृष्टि इतनी तेज थी कि टीन की छतों पर भी असर दिखा। खेतों में जमा पानी के कारण फसलें उठने की स्थिति में नहीं हैं। पशुओं के चारे का भी संकट पैदा हो गया है। किसानों ने बताया कि अगर जल्द पानी निकासी और राहत की व्यवस्था नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है।


इस आपदा के बाद पूरे इलाके में मायूसी छा गई है। गांवों में किसान अपने खेतों में खड़े होकर बर्बाद फसल को देख रहे हैं। कई किसानों की आंखों में आंसू हैं। उनका कहना है कि एक तरफ कर्ज का दबाव है, दूसरी तरफ आमदनी का कोई साधन नहीं बचा है।
पीड़ित किसानों ने प्रशासन और सरकार से तत्काल मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही केसीसी लोन माफ करने की भी गुहार लगाई है। किसानों का कहना है कि अगर कर्ज माफ नहीं हुआ तो वे दोबारा खेती करने की स्थिति में नहीं रहेंगे।


प्रखंड कृषि पदाधिकारी अभिषेक राज ने बताया कि फाला, मिर्जापुर, दुबनोची, गोरुखाल सहित कई पंचायतों में फसलों को भारी नुकसान हुआ है। विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। रिपोर्ट तैयार कर वरीय अधिकारी को भेजी जाएगी, ताकि सरकार की ओर से सहायता उपलब्ध कराई जा सके।


वहीं, सभी पंचायतों के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन से शीघ्र सर्वे कराने और मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह आपदा किसानों के लिए बड़ी आर्थिक चोट है। ऐसे में सरकार को विशेष राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए, ताकि किसान दोबारा खड़े हो सकें।


तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने पोठिया के किसानों की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है। अब किसानों की निगाहें प्रशासनिक मदद और सरकारी राहत पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में अगर समय पर सहायता नहीं मिली, तो यह संकट और गहरा सकता है।

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